फोटो कैप्शन: मांडा के महेवा कला में नारद मोह की लीला का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : Archive
महेवा कला गांव में चल रही रामलीला में रविवार रात कलाकारों ने नारद मोह की लीला का मनोरम मंचन किया। कामदेव पर विजय प्राप्त करने के बाद देवर्षि नारद को अहंकार हो गया। श्रीहरि ने अपनी माया से एक नगर का निर्माण कर देवर्षि के अभिमान का नाश किया। नारद का अहंकार मिटने के बाद पूरा पंडाल श्रीहरि के जयकारों से गूंज उठा। इंद्र की भूमिका में गुलाब पांडेय, शीलनिधि की भूमिका में देवी प्रसाद वैश्य और श्रीहरि की भूमिका में अविनाश शर्मा के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।
इसी तरह नहवाई गांव में चल रही रामलीला में कलाकारों ने धनुष यज्ञ का मंचन किया। राजा जनक ने स्वयंवर में पहुंचे राजाओं के सामने शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी। सभी राजा असफल रहे, जिससे राजा जनक संतप्त हो उठे। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा लेकर प्रभु श्रीराम ने शिव धनुष का खंडन कर उनका संताप दूर किया। इसके बाद पूरा पंडाल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। राम की भूमिका में ओम, लक्ष्मण की भूमिका में आयुष, रावण की भूमिका में आशुतोष तिवारी, जनक की भूमिका में शिवशंकर मिश्र और पेटहाव राजा की भूमिका में हीरा मिश्र के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।