Tenancy includes open house ground
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उप्र किराया नियंत्रण कानून की धारा 3 (1) के अंतर्गत मकान के साथ खुली जमीन भी उसी मकान का हिस्सा मानी जाएगी। यदि मकान के लॉन में जानवरों की चरही किराये पर दी गई है तो उसका किराया न देने पर किरायेदारी कानून के तहत कार्यवाही में बेदखली की जा सकती है। किरायेदार ने खुले मैदान पर छत न होने के आधार पर भवन मानने से इंकार कर दिया था और कहा था कि उसकी किरायेदारी की बेदखली किराया कानून के तहत नहीं की जा सकती । कोर्ट ने जानवरों की चरही को भवन का हिस्सा मानते हुए किरायेदारी से बेदखली के आदेश की वैध करार दिया है और किरायेदार की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है।
कानपुर नगर सब्जी मंडी स्थित मकान संख्या 76/184 के खुले एरिया में जानवरों की नाद के किरायेदार मुन्नू यादव की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी ने दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आउट हॉउस, गैराज, गार्डेन भी भवन का अंतरंग हिस्सा हैं। छत विहीन होने के बावजूद वह भवन माना जाएगा। मकान मालिक रामकुमार यादव ने मकान की खुली जगह पर जानवरों को खिलाने के लिए बनी चार नाद याची को किराए पर दी थी।
किराया न देने पर मकान मालिक ने 18 जून 16 को किरायेदार को नोटिस दिया। इसके बावजूद किरायेदार ने न किराया दिया और न ही चरही खाली किया तो वाद दायर हुआ। लघुवाद न्यायाधीश कानपुर नगर ने मकान मालिक के पक्ष में फैसला दिया । जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट के सामने सवाल था कि खुला मैदान जिस पर छत नहीं है क्या भवन है। कोर्ट ने कहा, भवन का आशय रिहायशी और व्यावसायिक है। इसमें सटी हुई जमीन भी शामिल है । जरूरी नहीं कि जमीन छत से ढंकी हो।