पहाड़ों पर बर्फबारी और पछुआ विक्षोभ की सक्रियता से शुक्रवार को पारा तेजी से लुढ़का। बर्फीली हवाओं के साथ ठंड और गलन ने लोगों को सताया। सुबह कोहरा रहने से दृश्यता भी कम रही। न्यूनतम तापमान के लुढ़कने की रफ्तार शुक्रवार को अचानक बढ़ गई। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक आने वाले दिनों में कड़ाके की ठंड सताएगी। कोहरा भी परेशानी का कारण बनेगा।
सुबह ठंडी हवाएं लोगों के शरीर में चुभती रहीं। धूप निकली लेकिन बर्फीली हवाएं ठंड से राहत दिलाने में बाधा बनीं। अधिकतम तापमान 24 घंटे में ही 23.5 डिग्री से 20.8 पर आ गया। वहीं न्यूनतम तापमान भी 9.2 डिग्री से गोता लगाकर 7 डिग्री सेेल्सियस पर आ टिका। आर्द्रता का स्तर 86-29 पर रहने से नमी गलन का कारण बनी।
शीतलहरी और ठंड के प्रकोप से हड्डी के जोड़ों के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। नसों में खिंचाव के कारण बीमारों की संख्या अचानक बढ़ी है। धमनियों में सिकुड़न के कारण दिल के मरीजों की भी दिक्कत बढ़ी है। एसआरएन के फिजीशियन डॉ. आरएन पांडेय के मुताबिक बच्चों और बुजुर्गों को ठंड से बचाने की जरूरत है। ओपीडी में ठंड प्रभावित मरीजों की संख्या बढ़ी है। वहीं कॉडियोलॉजिस्ट डॉ. राजपाल ने बताया कि यह मौसम बीपी, शूगर और दिल के रोगियों के लिए ठीक नहीं हैं। चेस्ट पेन की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है।
मौसम विज्ञानी प्रोफेसर एचएन मिश्रा के मुताबिक शीतलहर का प्रकोप जारी रहेगा। संभावना है कि हर दिन तापमान कम होगा। ऐसे में 31 दिसंबर तक ठंड और गलन और बढ़ सकती है। वहीं, जनवरी के पहले हफ्ते में पश्चिमी विक्षोभ बनने और हवा की दिशा बदलने के कारण मौसम साफ हो सकता है।