पहले व्हाट्स एप चैट और अब एक पत्र वायरल होने के बाद विवाद में घिरे कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के समर्थन में शुक्रवार को बड़ी संख्या में शिक्षक और छात्र सड़क पर उतर आए। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर से गांधी भवन तक पैदल मार्च निकाला और कहा कि वे सभी विश्वविद्यालय की सुरक्षा, शांति एवं प्रगति के लिए कुलपति के साथ खड़े हैं।
शिक्षकों और छात्रों ने कहा कि कुछ छात्र नेता विश्वविद्यालय की गरिमा को तार-तार करने पर तुले हैं। झूठ का सहारा लेकर विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाना चाहते हैं। मार्च में शामिल शिक्षकों और छात्रों ने कुलपति को पाक-साफ एवं विकासात्मक प्रकृति का बताते हुए उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का संकल्प लिया। साथ ही कुलपति की छवि खराब करने की साजिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उधर, चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे के नेतृत्व में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों की बैठक में कुलपति पर लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह पर आरोप लगाया कि वह कुलपति के खिलाफ भ्रामक प्रचार कर विश्वविद्यालय के वातावरण बिगाड़ना चाहती हैं। आरोप लगाया कि ऋचा सिंह ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य के कारण यह दुष्प्रचार किया और एक फर्जी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बैठक में प्रो. अर्चना चहल, डॉ. सरोज यादव, प्रो. लालसा यादव, डॉ. दीपशिखा सोनकर, डॉ. ज्योति मिश्रा, डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. राकेश सिंह, डॉ. सुजीत कुमार सिंह, डॉ. विनम्र सेन, डॉ. संतोष कुमार सिंह, डॉ. गजुला राजू आदि मौजूद रहे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को लेकर वायरल हुए पत्र के मामले में विश्वविद्यालय के पीआरओ की ओर से जारी बयान पर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने आपत्ति दर्ज कराई है। ऋचा ने पीआरओ को नोटिस देकर कहा है कि 48 घंटे में आरोप साबित नहीं किया तो उनके खिलाफ मानहानी का केस कर देंगी। वहीं, इविवि प्रशासन ने भी ऋचा सिंह के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने का निर्णय लिया है।
पीआरओ डॉ. चितरंजन कुमार की ओर से आरोप लगाया था कि ऋचा सिंह ने छात्रसंघ अध्यक्ष रहते हुए एक लाख 29 हजार रुपये का गबन किया और उनके खिलाफ कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज है। इस पर ऋचा सिंह ने पीआरओ को दिए नोटिस में कहा है कि बतौर अध्यक्ष उन्होंने छात्रसंघ के लिए एक रुपया भी नहीं लिया। बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन से जनसूचना अधिकार के तहत पूछा है कि छात्रसंघ के नाम से जारी पैसा कहां गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक इसकी सूचना नहीं दी है। ऋचा ने डॉ. चितरंजन सिंह को चुनौती देते हुए कहा है कि उन्होंने गबन के जो आरोप लगाए हैं, उसकी एफआईआर की प्रति 48 घंटे में उपलब्ध कराएं। अगर प्रमाण नहीं दिए तो उनके खिलाफ मानहानी का केस करेंगी।
उधर, पीआरओ डॉ. चितरंजन कुमार का कहना है कि वह अपने आरोप पर कायम हैं और उनके पास प्रमाण भी है। पीआरओ के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन ने तय किया है कि जल्द ही ऋचा सिंह पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। उन्होंने अनर्गल तथ्यों के आधार पर प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति को पत्र लिखा और झूठा बयान देकर विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाई। विश्वविद्यालय प्रशासन उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएगा।