इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में बने गतिरोध पर शिक्षकों की सियायत भी गरमा गई है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस फसाद के पीछे शिक्षकों की राजनीति बड़ा कारण है। अन्यथा, यह विवाद इतना नहीं बढ़ पाता। विश्वविद्यालय के अफसरों की बैठक में भी उनके बीच की सियासत खुलकर सामने आ गई और प्रशासनिक पदों पर होने के बावजूद एक खेमा इस संबंध में होने वाले निर्णयों से पूरी तरह से अलग-थलग है।
प्रोफसर ए.सत्यनारायण ने 14 अगस्त को कार्यभार संभाला था। गौर करने वाली बात यह है कि उनके पास कार्यवाहक के तौर पर जिम्मेदारी है और अक्तूबर के ही पहले पखवाड़ा में नए कुलपति की नियुक्ति होने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद प्रोफेसर ए.सत्यनारायण ने कार्यभार संभालने के कुछ दिन बाद ही डीएसडब्ल्यू, पीआरओ समेत कई अफसरों को बदल दिया।
चुनाव अधिकारी बनाए गए प्रोफेसर आरएस पांडेय को एक और जिम्मेदारी देते हुए डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट बना दिया गया है। कुलपति ने रजिस्ट्रार को बदले जाने की भी बात कही है। इनके अलावा अन्य पदों पर भी बदलाव की बात कही जा रही है। गौर करने वाली बात यह भी है कि नई टीम से वर्षों से विश्वविद्यालय में प्रभावी दखलंदाजी रखने वाले शिक्षकों के गुट को बिल्कुल अलग-थलग कर दिया गया है। इससे उनमें नाराजगी है। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव के रूप में उन्हें कुलपति को कमजोर करने का मौका मिलने की बात कही जा रही है।