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UP : परिषदीय विद्यालयों के 31,685 सरप्लस घोषित शिक्षक 27 तक दाखिल कर सकेंगे आपत्ति, हाईकोर्ट ने दी मोहलत

Wed, 22 Jul 2026 01:38 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात 31,685 सरप्लस घोषित शिक्षकों को 27 जुलाई तक संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय में आपत्ति दाखिल करने की अंतिम मोहलत दे दी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात 31,685 सरप्लस घोषित शिक्षकों को 27 जुलाई तक संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय में आपत्ति दाखिल करने की अंतिम मोहलत दे दी है। स्पष्ट किया है कि सरप्लस घोषित ऐसे शिक्षक जिन्हें सूची में दर्ज आंकड़ों, वरिष्ठता या चयन प्रक्रिया पर आपत्ति है, उन्हें ऑफलाइन आपत्ति जमा करने के बाद उसकी रसीद प्राप्त करना अनिवार्य होगा। साथ ही आपत्ति की प्रति बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को स्पीड पोस्ट से भी भेजनी होगी, ताकि उस पर विचार किया जा सके।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने चंदौली के सौरभ कुमार सिंह की विशेष अपील पर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिलों से प्राप्त आपत्तियां एक अगस्त तक बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को भेजी जाएंगी। इसके बाद व्यक्तिगत या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई होगी। 10 अगस्त से स्कूल, ब्लॉक और जिला स्तर पर संशोधित रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। अगली सुनवाई पांच अगस्त को होगी।

सरकार ने आठ अलग-अलग प्रारूपों में सूची जारी कर 31,685 शिक्षकों को सरप्लस चिह्नित किया है। इन शिक्षकों का समायोजन ऐसे विद्यालयों में किया जाना प्रस्तावित है, जहां शिक्षक नहीं हैं या केवल एक है। इसके खिलाफ प्रभावित शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शिक्षकों की ओर से दलील दी गई कि कई विद्यालयों में वरिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस घोषित किया जा रहा है, जबकि उनसे जूनियर शिक्षक वहीं तैनात हैं।
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इस पर कोर्ट ने कहा कि यदि किसी विद्यालय में पिछले पांच वर्षों के भीतर नियुक्त जूनियर शिक्षक कार्यरत हैं तो वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस घोषित किए जाने पर आपत्ति की जा सकती है। वहीं, पांच साल से अधिक समय पहले नियुक्त शिक्षकों के मामलों में फर्स्ट कम, फर्स्ट गो (वरिष्ठता के क्रम) का सिद्धांत लागू रहेगा, जैसा कि एकल पीठ ने अपने 22 मई 2026 के आदेश में निर्धारित किया था।

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