प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 3900 पद खाली पड़े हैं। रिक्त पदों के सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के कारण उच्च शिक्षा निदेशालय और उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) में सभी काम ठप हो गए हैं। ऐसे में असिस्टेंट प्रोफेसर के 3900 पदों पर प्रस्तावित भर्ती अब ठंडे बस्ते में चली गई है।
अशासकीय कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया दो साल से फंसी हुई है। दो साल पहले उच्च शिक्षा निदेशालय ने 534 पदों पर भर्ती के लिए उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को अधियाचन भेजा था लेकिन आयोग की ओर से विज्ञापन जारी किए जाने से पहले ही शिक्षा निदेशालय ने अधियाचन वापस ले लिया। उस वक्त निदेशालय की ओर से कहा गया कि आरक्षण की नए सिरे से समीक्षा के बार पदों का अधियाचन दोबारा भेजा जाएगा। इसके बाद आरक्षण की समीक्षा की गई और जैसे ही अधियाचन तैयार हुआ, उसी वक्त शासन से निर्देश आ गए कि गरीब सवर्ण आरक्षण के तहत पदों का अधियाचन तैयार किया जाएगा।
यह काम भी पूरा कर लिया लेकिन इसके बाद शासन से एक और नया निर्देश आ गया कि प्रत्येक जिले की अशासकीय महाविद्यालयों में सभी रिक्त पदों का सत्यापन जिला स्तरीय कमेटी करेगी और इस कमेटी के अध्यक्ष संबंधित जिलाधिकारी होंगे। सभी जिलों में कुल मिलकर 3900 रिक्त पदों का सत्यापन किया गया और यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने रिक्त पदों की सूची शासन को भेज दी। निदेशालय को शासन से अनुमति मिलने का इंतजार था, ताकि हरी झंडी मिलते ही पदों का अधियाचन आयोग को भेज दिया जाए लेकिन इसी बीच कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ने लगा और उच्च शिक्षा निदेशालय एवं आयोग में सभी काम ठप हो गए। अब स्थिति सामान्य होने के बाद ही भर्ती प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। ऐसे में अभ्यर्थियों को इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।