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अंग्रेजों से आजाद पर टैक्स के गुलाम

Sat, 15 Aug 2015 01:52 AM IST
अमित सरन/अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। हम अंग्रजों से तो आजाद हो गए, मगर टैक्स के गुलाम रह गए। अंग्रेजी हुकूमत ने नमक पर टैक्स लगाया तो भारतीयों के विरोध के आगे उसे घुटने टेकने पड़े और देश छोड़कर भागना पड़ा। देश की आजादी के लिए शहीद हुई हस्तियों ने सपने भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन इसी देश में सिर्फ नमक नहीं बल्कि हर उस चीज पर टैक्स लगेगा, जो जिंदा रहने के लिए जरूरी है। यह टैक्स अंग्रेज नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे इसी देश का नमक खाने वाले वसूल रहे हैं।
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पानी पीना है तो वाटर टैक्स और सिर छिपाने के लिए छत चाहिए तो हाउस टैक्स देना पड़ता है। बाजार से बोतल बंद पानी खरीदा तो भी टैक्स और रेस्टोरेंट में बैठकर भोजन किया तो वैट के साथ सर्विस टैक्स भी अदा करना पड़ता है। पेट भरना है तो दाल, चावल, आटा, मसाले, घी, सब्जियों सहित खाने की हर चीज खरीदने पर वैट या किसी दूसरी तरह का टैक्स, यहां तक कि पेट खाली करना है तो सीवर टैक्स। बीमार पड़े तो जिंदा रहने के लिए दवा खानी है, सो दवाएं खरीदने पर भी टैक्स। अगर शरीर के अंगों ने साथ छोड़ा और सांस नहीं ले सकते तो ऑक्सीजन खरीदने के लिए भी टैक्स।

मौत हुई तो चिता की लकड़ी खरीदने पर टैक्स और अंतिम संस्कार से संबंधित हर सामग्री पर टैक्स। मनोरंजन के लिए फिल्म देखने गए या किसी मेले में बच्चे को झूला झुलाया तो इंटरटेनमेंट टैक्स और सफर पर निकले तो टोल टैक्स। जीवन भर मेहनत करने के बाद कर्मचारी भविष्य निधि में जमा रकम निकालने पर टैक्स और जीवन बीमा प्रीमियम सहित हर प्रकार की सेवा पर टैक्स। गैर मान्यता प्राप्त स्कूल-कॉलजों और कोचिंग में पढ़ाई के नाम पर भी 14 फीसदी सर्विस टैक्स। यहां तक कि खादी छोड़ कॉटन, पॉलीथिन, कागज से बने तिरंगे पर भी टैक्स।
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व्यापारी कच्चा माल मंगाते हैं तो प्रवेश शुल्क लगता है। निर्माण के बाद उत्पाद शुल्क। प्रदेश में बेच रहे हैं तो वैट और प्रदेश के बाहर सप्लाई की तो सेंट्रल सेल्स टैक्स भी देना पड़ता है। जो कमाई हुई, उस पर आयकर। यह पैसा उपभोक्ताओं से वसूला जाता है। आम आदमी को पता भी नहीं चलता और उसकी कटती रहती है।

टैक्स में जाता है आय का 65 फीसदी हिस्सा
कर एवं वित्त सलाहकार पवन जायसवाल का कहना है कि आयकर एवं अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े टैक्स का ही हिसाब निकाला जाए तो आम आदमी की माह भर की कमाई का 65 फीसदी हिस्सा आयकर एवं दूसरे तरह के टैक्स पर चला जाता है। ऐसे में कहा जा सकता है आम आदमी के लिए खर्च की स्वतंत्रता पर टैक्स की बेड़ियां लगी हैं।
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