प्रयाग संगीत समिति के 55वें अखिल भारतीय संगीत सम्मेलन के चौथे दिन बुधवार को एक मंच पर देशभर के कलाकारों का संगम हुआ। इलाहाबाद के मास्टर फैजान अहमद खान ने शास्त्रीय संगीत की शानदार प्रस्तुति दी। राग यमन में ‘सलोना रे मोरा बलमा, ‘ऐरी आली पिया बिन’, ‘तानुम दिर दिन’ और राग दादरा में ‘याद पिया की आई’ की प्रस्तुति देकर सबका दिल जीत लिया। उनके साथ तबले पर पं. पूरन मिश्र और हारमोनियम पर उस्ताद शमशाद अहमद ने संगत दी। पं. भास्कर दास की बांसुरी और रोहम गुप्ता की सितार जुगलबंदी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। तबले पर उनके साथ संगत पं. उदय मजूमदार ने दी।
यूएसए से आईं रेशमा श्रीवास्तव ने राग किरवानी में सितार की धुनों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति में उनके साथ तबले पर अनूप बनर्जी ने संगत दी। शालू श्रीवास्तव ने कथक की मुद्राओं से सभी को मोहा। उन्होंने शिव स्तुति ‘आंगिकम, भूवनम वाचिकम’, भाव नृत्य में द्रौपदी चीर हरण, ठुमरी में ‘मेरी सुनो श्याम’ और कथक की पारंपरिक तीन ताल में आमद, थाट, तोड़े परन, तिहाइयां, गत निकास में प्रस्तुति दी।
उनके साथ जकी अहमद गायन, पं. कृष्ण महाराज पढ़ंत, साबिर हुसैन तबला और जनुैद खां ने सारंगी पर संगत देकर आयोजन को और बेहतर बताया। अंजना नाथ ने ‘रतिया हमारी बैरन भई’, ‘श्याम मोरा अब न आये’, ‘राग बसंत में रंग लगा दे मोरे श्याम’, दादरा में ‘पिचकारी ना मारो नंदलाल’ की प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर प्रभाकर दयाल ने संगत दी। समिति सचिव अरुण कुमार ने सभी कलाकारों को नटराज की मूर्ति देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन मधुरानी शुक्ला ने किया।