याची यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज (ईसीसी) प्रयागराज में अंग्रेजी विभाग से प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुई थी। उन्होंने जीपीएफ के साथ पेंशन स्कीम देने की मांग करते हुए अर्जी दाखिल की थी, जिसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने खारिज कर दिया। इसके विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही कहा कि सीपीएफ के बदले जीपीएफ के साथ पेंशन स्कीम लेने की मांग मामले में कार्यकारिणी परिषद एक माह में नियमानुसार निर्णय ले। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने याची प्रतिमा शोभा मैसी के वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र और हर्षदीप कुशवाहा को सुनकर यह आदेश दिया।
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याची यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज (ईसीसी) प्रयागराज में अंग्रेजी विभाग से प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त हुई थी। उन्होंने जीपीएफ के साथ पेंशन स्कीम देने की मांग करते हुए अर्जी दाखिल की थी, जिसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने खारिज कर दिया। इसके विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
कोर्ट ने विश्वविद्यालय को दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले के आलोक में निर्णय लेने का निर्देश दिया। वहीं, विश्वविद्यालय ने कहा कि इस संबंध में केंद्र सरकार से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। याची को ग्रेच्युटी के 20 लाख रुपये दिए गए हैं। इस आधार पर वह पेंशन की हकदार नहीं है। मांग अस्वीकार कर दी गई।
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कोर्ट ने कहा कि जिस फैसले का हवाला दिया गया उसे देखा नहीं गया है। साथ ही ऐसे फैसले के आधार पर मांग खारिज कर दी, जो याची के मामले में लागू नहीं होगा। कोर्ट ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव के आदेश को रद्द कर दिया।