हाईकोर्ट ने कहा है कि तहसीलदार (सहायक कलेक्टर) को राजस्व संहिता के तहत सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने तथा अतिक्रमण से हुए नुकसान का मुआवजा वसूल करने का अधिकार है। संहिता की धारा 67 के तहत वह इन अधिकारों का प्रयोग कर सकता है तथा नुकसान की वसूली भू राजस्व की तरह कर सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने ललितपुर की महरानी तहसील के तहसीलदार को मदवारा गांव में बंजर जमीन पर हरीराम और अन्य लोगों के अवैध कब्जे की शिकायत की जांच कर छह माह में निर्णय लेने को कहा है।
गांव के जाहर सिंह की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने दिया। गांव सभा ने अपनी 0.1020 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जेदारों को हटाने के लिए निषेधाज्ञा वाद दायर किया था। इसके खिलाफ याचिका दाखिल कर कहा गया कि तहसीलदार को राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत भूमि का अवैध कब्जे से मुक्त कराने का अधिकार है। मगर इस अधिकार का उपयोग नहीं किया जा रहा है। अवैध कब्जे की सूचना भूमि प्रबंधन समिति या हल्का लेखपाल द्वारा तहसीलदार को दी जा सकती है। जिस पर वह पक्षकारों को सुनकर निर्णय दे सकता है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अवैध कब्जे से भूमि खाली कराई जाए और इससे हुए नुकसान की वसूली की जाए। अधिनियम से स्पष्ट है कि ऐसे मामलों में सिविल वाद नहीं किया जा सकता है।