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एसपी रेलवे और दरोगा में टशन

Fri, 08 Sep 2017 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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एसपी रेलवे इलाहाबाद दीपक भट्ट और जीआरपी थाने के सब इंस्पेक्टर कैलाशपति सिंह के बीच फोन और आमने-सामने तू-तड़ाक हो गई। दरोगा का आरोप है कि एसपी ने एक मामले में गिरफ्तारी नहीं करने पर पहले फोन पर गालियां दी फिर कार्यालय में भी गालीगलौज करते हुए धमकाया। इससे दरोगा की तबीयत बिगड़ गई। हालांकि एसपी का कहना है कि दरोगा नई तैनाती पर नहीं गया और उनसे बदजबानी की इसलिए उसे निलंबित किया गया। गाली देने का आरोप गलत है।
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जीआरपी थाने के उपनिरीक्षक कैलाशपति सिंह के  अनुसार, बुधवार दिन में एसपी रेलवे दीपक भट्ट ने उनके निजी नंबर पर फोन किया और दो ठेकेदारों के विवाद में दर्ज 307 के मुकदमे में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं करने के लिए गालियां देने लगे। कैलाशपति के मुताबिक, वह मुकदमे के जांच अधिकारी नहीं हैं तब भी गाली देने पर वह आहत हुए इसलिए इंस्पेक्टर मनोज सिंह से अनुरोध किया कि वह उनके साथ एसपी रेलवे कार्यालय चलें। वे कार्यालय पहुंचे तो एसपी दीपक भट्ट ने उन्हें देखते ही धमकाया कि तुम्हारी यहां आने की हिम्मत कैसे हुई। साथ ही मां-बहन की गालियां देते हुए चले जाने को कहा। सिविल लाइंस थाने की पुलिस भी बुला ली। दरोगा के अनुसार, गालीगलौज का विरोध करने पर बर्खास्त करने की धमकी दी। एसपी रेलवे उन्हें कई रोज से ऐसी धमकी फोन पर दे रहे थे। दरोगा ने अमर उजाला से बताया-गाली और धमकी से उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें डॉक्टर के पास जाना पड़ा। बृहस्पतिवार को तबीयत में कुछ सुधार होने पर थाने आए तो निलंबन का आदेश मिला।। दरोगा ने कहा कि वह एसपी रेलवे की गालीगलौज और धमकी की शिकायत आईजी तथा एडीजी से करेंगे।

इस मसले पर एसपी रेलवे दीपक भट्ट ने अमर उजाला से कहा कि गालीगलौज और धमकी का आरोप झूठा है। दरोगा ऐसा आरोप जाने क्यों लगा रहा है। उसका निलंबन सिराथू चौकी में स्थानांतरण के बावजूद ज्वाइन नहीं करने पर किया गया है। वह कार्यालय में आया तो सीओ और इंस्पेक्टर भी मौजूद थे। आरोप गलत है। उधर, दरोगा का कहना है कि पहले उनका स्थानांतरण कानपुर किया गया था। समस्याओं का हवाला देकर आग्रह करने पर एसपी ने अपना पेशकार बना लिया था। फिर सिराथू चौकी तबादला हुआ तो उन्होंने ज्वाइन कर लिया था। वहां से जीआरपी थाने बुला लिया गया। तबादला आदेश का पालन न करने की बात गलत है।
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एसएसपी पर लगाए थे दरोगा ने इल्जाम- करीब डेढ़ साल पहले तत्कालीन एसएसपी जोगेंद्र कुमार और जार्जटाउन थाने के उपनिरीक्षक राजीव तिवारी के बीच टशन हो गई थी। राजीव तिवारी ने एसएसपी कार्यालय से लौटकर थाने की जीडी में तस्करा डाला कि एसएसपी साहब ने उसे जलील किया किया जिससे उनकी मानसिक स्थिति खराब हो गई। मामला सार्वजनिक होने पर दरोगा को निलंबित कर महोबा स्थानांतरित कर दिया गया था। हालांकि बाद में स्थानांतरण रद्द हो गया।

सीओ और सिपाही में भिड़ंत-आठ महीने पहले तत्कालीन सीओ प्रथम रूपेश सिंह की खुल्दाबाद थाने केभीतर सिपाही वासुदेव यादव से भिड़ंत हो गई थी। मारपीट की नौबत आ गई। थाने में हंगामा मच गया था। सिपाही को निलंबित कर दूसरे थाने तबादला कर दिया गया। हालांकि बाद में मामला सुलट गया था। सीओ का कहना था कि सिपाही ने एक अपराधी की गिरफ्तारी के बारे में पूछने पर बदसलूकी की जबकि सिपाही का आरोप था कि सीओ ने कॉलर पकड़ गालियां दीं।
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