हमें यह तो पता है कि सूर्य से आने वाला विकिरण एवं ग्रीन हाउस गैसें पर्यावरण को प्रभावित करती हैं, लेकिन स्वीट पेलोड से यह जानने में मदद मिलेगी कि पर्यावरण को प्रभावित करने में दोनों की कितनी हिस्सेदारी है। साथ ही यह भी पता चलेगा कि स्किन कैंसर का कारण बनने वाली बड़ी तरंगदैर्ध्य वाली किरणें पृथ्वी में कहां-कहां अधिक मात्रा में पहुंचती हैं और कहां कम मात्रा में हैं। मेडिकल साइंस के लिए यह जानकारी काफी अहम हो सकती है।
इसके साथ ही सेटेलाइट की बेहतर तरीके से मॉनीटरिंग हो सकेगी और सेटेलाइट टीवी, मोबाइल फोन से आने वाले रेडिएशन से पड़ने वाले प्रभाव का भी अध्ययन भी किया जा सकेगा। सूरज में अक्सर होने वाले विस्फोटों के बारे भी अनुमान लगाया जा सकेगा। प्रो. दुर्गेश के अनुसार दो हफ्ते पहले ही स्वीट पेलोड का आंतरिक स्विच ऑन किया गया है, जिससे पता चला है कि इसमें लगे सभी उपकरण काम कर रहे हैं। कुछ हफ्तों बाद इसे पूरी तरह से स्विच ऑन कर दिया जाएगा और पेलोड से महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने लगेंगी।
गोरखपुर के प्रो. दुर्गेश ने यूपी का नाम किया रोशन
स्वीट पेलोड का निर्माण करके मूलत: गोरखपुर के रहने वाले प्रो. दुर्गेश त्रिपाठी ने देश में यूपी का नाम रोशन किया है। प्रो. दुर्गेश ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से एमएससी करने के बाद लिंडाऊ जर्मनी से सोलर एनर्जी पर पीएचडी की और फिर कैंब्रिज ब्रिटेन से एप्लाइड मैथ्स एवं थिओरेटिकल फिजिक्स से पोस्ट डॉक्टोरल की उपाधि हासिल की। वर्ष 2011 में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में आयुका से जुड़े और अब वहां प्रोफेसर हैं।