Swaroopanand's camp will not be put on less land
अड़ियल रहा प्रशासन का रवैया तो नहीं लगाएंगे मेले में शिविर
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद की भूमि में कटौती पर शिविर प्रभारी ने दी चेतावनी
प्रयागराज। ज्योतिष एवं द्वारका-शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के माघ मेले में संगम की रेती पर लगने वाले शिविर को लेकर फिर अड़चनें पैदा हो गई हैं। भूमि आवंटन के मुद्दे पर प्रशासन से असहमति के बाद वर्ष 2018 में उनकी ओर से शिविर लगाने से मना कर दिया गया था, अबकी फिर ऐसी ही स्थितियां बनती जा रही हैं। शिविर प्रभारी और मनकामेश्वर मंदिर के मुख्य व्यवस्थापक स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने दो टूक कहा है कि भूमि आवंटन के मामले में यदि प्रशासन अपना अड़ियल रवैया नहीं छोड़ता है तो माघ मेले में शिविर नहीं लगाया जाएगा।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने बताया कि ज्योतिर्मठ के नाम पर दौ सौ गुणे दो सौ वर्ग फीट और चार सहायक संस्थाओं स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, द्वारका शारदा पीठ, आध्यात्मिक उत्थान मंडल और शाकंभरी के नाम पर 200 गुणे 160 यानी कुल 300 गुणे 160 वर्ग फीट भूमि मिलती रही है। लेकिन, अबकी प्रशासन ने सिर्फ दो सौ गुणे दो सौ ही भूमि आंवटित की है। इस बारे में आपत्ति किए जाने पर मुझसे ही पुराने प्रपत्रों के साथ मिलने को कहा गया लेकिन मुलाकात के पहले ही भूमि आवंटित कर दी गई। अब प्रशासन बाकी भूमि देने में आनाकानी कर रहा है। मेला अधिकारी का कहना है कि अब और भूमि आवंटित नहीं की जाएगी।
स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमल न करके जाने किस समायोजन की बात कह रहा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक ही बीते कुंभ मेले में दोनों पीठ और बाकी संस्थाओं की भूमि आंवटित की गई थी। अब संबंधित संस्थाओं के नाम पर यदि 200 गुुणे 160 भूमि अलग कर दी जाए तो बाकी 200 गुणे 40 वर्ग फीट में ज्योतिर्मठ का शिविर नहीं लग पाएगा। वहीं यदि यह ज्योतिर्मठ की भूमि है तो संबंधित संस्थाओं की भूमि कहां गई। माघ मेले के दौरान शिविर में अनेक विशिष्ट आयोजन होते हैं, ऐसे में भूमि कटौती के बाद शिविर नहीं लगाया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।