प्रयागराज। पीएम मोदी की कैबिनेट द्वारा ‘इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस’ नाम की नई सेवा शुरू करने की घोषणा के बाद रेल यूनियनों ने इस निर्णय को निजीकरण की ओर बढ़ता कदम बताया है। यूनियन नेताओं ने इस निर्णय के खिलाफ आरपार की लड़ाई करने की बात कही है। एनसीआर जोन की दो मेंस यूनियन और इंपलाइज संघ ने इस निर्णय के खिलाफ इलाहाबाद, आगरा, झांसी के साथ जोन मुख्यालय में प्रदर्शन की बात कही है।
यूनियन नेताओं का मानना है कि डा. विवेक देवराय कमेटी की रिपोर्ट वास्तव में रेलवे को पूरी तरह से निजीकरण करने का रास्ता है। पहले तेजस एक्सप्रेस के रूप में निजी ट्रेन चलाना और अब मैनेजमेंट सर्विस का गठन कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने की ओर प्रभावी कदम है। मेंस यूनियन के जोनल महामंत्री आरडी यादव के अनुसार इस रिपोर्ट की सिफारिशों को रेलवे प्रशासन एक-एक करके लागू कर रहा है। इस रिपोर्ट में रेलवे को कार्पोरेट घराने को सौंपे जाने की सिफारिश की गई है। इसमें ट्रेनों के साथ-साथ निजी कंपनियों को भी यात्री एवं मालगाड़ी चलाने की सिफारिश की गई है। यह निर्णय रेलवे को धरातल में ले जाएगा। इसमें ग्रुप डी के सभी पदों को खत्म करने की भी बात है।
देबराय कमेटी की रिपोर्ट में है यह सिफारिशें
प्राइवेट कंपनियों को ट्रेन सौंपना और उन्हीं को किराया तय करना।
सीनियर सिटीजन, बीमार, खिलाड़ी, मान्यता प्राप्त पत्रकार आदि को किराये में कोई रियायत नहीं देना।
सभी प्रोडक्शन यूनिट और वर्कशॉप को इंडियन रेलवे मैनफैक्चिरिंग कंपनी में तब्दील करना।
रेलवे के सभी अस्पताल और स्कूलों को बंद करना।
आरपीएफ की जगह प्राइवेट सिक्योरिटी स्टेशनों पर लगाना।