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दंडी संन्यासियों संग शिविर में पहुंचे स्वामी वासुदेवानंद

Fri, 05 Jan 2018 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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माघ मेले में बृहस्पतिवार को स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के प्रवेश करने के साथ ही त्रिवेणी मार्ग की रौनक बढ़ी। दंडी स्वामियों के साथ भव्य शोभायात्रा के तहत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वह त्रिवेणी मार्ग स्थित शंकराचार्य शिविर पहुंचे। शंकराचार्य सेवक मंडल के सदस्यों, बटुकों, श्रद्धालुओं के अतिरिक्त काशीसुमेरू पीठाधीश्वर के शिष्यों ने भी प्रवेश द्वार पर माल्यार्पण करके स्वागत किया। इस अवसर पर जयकारे भी लगे।
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अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम से शोभायात्रा निकली। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती विशेष रूप से बने रथनुमा बस पर सवार थे। घुड़सवारों ने अगुवाई की। उनके पीछे ध्वजवाहकों, नागा संन्यासियों, दंडी स्वामियों सहित अलग-अलग गाड़ियों में श्रद्धालुओं का काफिला रहा।  शोभायात्रा चुंगी चौराहा, फोर्ट रोड चौराहा, त्रिवेणी रोड, काली सड़क पुल नंबर तीन से गंगा पार कर तुलसी मार्ग चौराहे से मुड़कर त्रिवेणी मार्ग रामानुज चौराहा होते हुए शिविर पहुंचकर पूरी हुई।

इससे पहले स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने गंगा पूजन किया, आरती उतारी और मेले तथा राष्ट्र की कुशलता के लिए प्रार्थना की। सचिव आचार्य छोटे लाल मिश्र और सचिव पंडित शिवार्चन उपाध्याय की देखरेख में निकली शोभायात्रा में प्रवक्ता ओंकार नाथ त्रिपाठी, दंडी स्वामी मुकुंदानंद, स्वामी विनोदानंद, विशुद्धानंद, विपिन मिश्र, ब्रह्मचारी जितेंद्रानंद, फूलचंद्र दुबे, मधु चकहा, पं.लालमणि तिवारी, आशीष, मुकेश, मनोज, सुदर्शन अग्रवाल,गोकुल गोस्वामी आदि शामिल थे।
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शोभायात्रा को जगह-जगह रोककर श्रद्धालुओं, संतों की ओर से स्वामी वासुदेवानंद का स्वागत किया गया। टीकरमाफी आश्रम के स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी, आचार्यहंस आदि ने कालीमार्ग शिविर के सामने माल्यार्पण किया।विश्व हिन्दू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल के पदाधिकारियों ने भी उनका स्वागत किया।

प्रवचन पंडाल पहुंचकर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने प्रवचन और आशीर्वचन दिया। कहा, अन्य तीर्थों में एक कल्प तपस्या करने से जो पुण्य प्राप्त होता है, वह पुण्य तीर्थराज प्रयाग में माघ मेले में एक माह का कल्पवास करने से प्राप्त होता है। गंगा और यमुना तीर्थराज प्रयाग के चंवर  जबकि अक्षयपट प्रयाग का छत्र है, इसीलिए सर्वत्र तीर्थराज प्रयाग की जयजयकार होती है।
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