प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों का सर्वे कराया जाएगा। इसके लिए गठित विशेषज्ञों की समिति इस बाबत रिपोर्ट भी तैयार करेगी कि बाढ़ के नुकसान को कैसे कम किया जा सके।
प्रयागराज में हर दूसरे वर्ष बाढ़ की स्थिति बन जाती है और नदियों का पानी बस्तियों में घुस जाता है। इस वर्ष तो तीन बार बाढ़ की स्थिति बनी। पिछले दिनों गंगा और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊंचा चला गया और 200 से अधिक गांव व मोहल्ले बाढ़ की चपेट में आ गए।
इसकी वजह से हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा। सैकड़ों बीघे धान और सब्जी की फसल भी बर्बाद हो गई। कई अन्य तरह के नुकसान भी हुए। मुश्किल यह कि एक बार फिर दोनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ बाढ़ की आशंका जताई जा रही है।
लगातार आ रही बाढ़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों के सर्वे का निर्णय लिया गया है। इसके लिए जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अलावा अन्य विभागों की समिति बनाई जाएगी। इसमें मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान समेत अन्य तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।
डीएम मनीष कुमार वर्मा का कहना है कि अभी फिर बाढ़ आने की आशंका है। बाढ़ का पानी निकलने के बाद समिति गठित की जाएगी। उनका कहना है कि समिति बाढ़ के कारणाें के साथ इसका दायरा और इससे होने वाले नुकसान को कम करने आदि बिंदुओं को लेकर अध्ययन करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गंगा-यमुना के जलस्तर में फिर बढ़ोतरी के आसार
गंगा और यमुना नदियों के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोतरी के आसार बन गए हैं। अफसरों का कहना है कि दो दिन पहले पीछे की तरफ से पानी छोड़ा गया है। इसके अलावा पहाड़ों पर बारिश भी जारी है। ऐसे में एक-दो दिनों में दोनाें नदियों का जलस्तर फिर से बढ़ सकता है। नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से सितंबर के पहले पखवाड़े में बाढ़ की भी आशंका जताई जा रही है। डीएम मनीष कुमार वर्मा का कहना है कि इसकी आशंका को देखते हुए पूरी तैयारी की गई है।