अल्लाह की राह में कुर्बानी के त्योहार ईद-उल-अजहा पर बाद नमाज लोगों ने घर वापसी पर बकरों की कुर्बानी कराई। घरों में गोश्त के साथ ही ईद की दस्तक देतीं सेवइयां भी पकाई गईं। लोगों ने परिजनों, रिश्तेदारों, दोस्तों संग खुशियां मनाईं। ईद की तरह ही ईद-उल-अजहा पर भी लोगों को अपने गैर मुस्लिम दोस्तों का बेसब्री से इंतजार रहा। मुबारकबाद देने और खुशियां साझा करने के लिए लोग पहुंचे भी।
लोगों का एक दूसरे को मुबारकबाद देने का सिलसिला बीती रात से ही शुरू होकर बुधवार को देर रात तक जारी रहा। लोग मुबारकबाद देने भी एक दूसरे के घर भी आते-जाते रहे। त्योहार को लेकर घरों में भी खासा तैयारी की गई थी। दोस्तों, मेहमानों के लिए नई प्यालियां, डिनर सेट खरीदे गए थे तो घर के सोफे के कवर और पर्दे भी बदले गए थे। मेहमनों के लिए घरों को भी सजाया गया था। करेली, दरियाबाद, रानीमंडी, रसूलपुर, नूरुल्लाह रोड, शाहगंज, नखासकोहना सहित शहर के तमाम मुस्लिम बहुल इलाकों में काफी चहल-पहल रही।
बाद नमाज रवायत के मुताबिक कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा गया। इसमें से एक हिस्सा जरूरतमंदों, दूसरा दोस्तों-रिश्तेदारों जबकि तीसरा हिस्सा घर की जरूरतों के लिए रखा गया। शहर काजी सहित कई संस्थाओं की ओर से की गई अपील कि कुर्बानी के गोश्त का जो हिस्सा इस्तेमाल में न हो, उसे इधर-उधर हरगिज न फेंके, पर लोगों ने अमल किया। हालांकि लोगों ने पहले से ही चिकवों को बुक कर रखा था, फिर भी उनका इंतजार बना रहा। कई जगहों पर तो कुर्बानी के बाद उन्होंने दोबारा आकर गोश्त के टुकड़े किए। वहीं मदरसों की ओर से भी ‘हिस्सा’ के लिए कुर्बानी कराई गई।
कुर्बानी का त्योहार ईद-उल-अजहा बुधवार को मनाया गया लेकिन कुर्बानी का सिलसिला शुक्रवार तक जारी रहेगा। इसके मद्देनजर बुधवार शाम से लेकर रात तक गली, चौराहों में बकरे लिए छोटे कारोबारी घूमते रहे। लोगों ने मंडियों के सामने से भी बकरे खरीदे। इसी तरह छुरियां तेज कराने के लिए बुधवार को भी लोग जुटे।