सईद अहमद अंसारी
त्योहारों से पहले रसोई का बजट बिगड़ गया है। तीन सप्ताह में थोक बाजार में चीनी 45 से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। खुदरा में तो यह 62-65 रुपये तक बिक रही है। चीनी में आई यह 15 रुपये प्रति किलो की बेतहाशा बढ़ोतरी बीते 10 साल में सबसे तेज मानी जा रही है।
मिठाई विक्रेता सुनील गुप्ता व शेरअली ने बताया कि चीनी की लागत बढ़ने से रसगुल्ला, बर्फी और पेड़े 10 से 15 रुपये किलो तक महंगे हो जाएंगे। पिछले साल दिवाली पर 400 रुपये किलो बिकने वाली मिठाई इस बार 450-470 के पार जा सकती है। ग्राहक पहले ही महंगाई से परेशान हैं। इसका असर अब सीधे घरों में भी दिख रहा है।
गृहिणी सुनीता, रश्मि व फरीदा बानो आदि ने बताया कि चाय, अचार, मुरब्बा और त्योहारों की मिठाई बनाने में चीनी सबसे ज्यादा लगती है। दो महीने पहले 45 रुपये में मिलने वाली चीनी अब बजट बिगाड़ रही है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलामंत्री गोपाल अग्रवाल ने बताया कि जब तक एथेनॉल नीति और चीनी उत्पादन में संतुलन नहीं बनता, कीमतों में राहत मुश्किल है।