प्रयागराज। निर्धन परिवारों तक मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के दावे के साथ शुरू हुई आयुष्मान भारत योजना उन सफाई कर्मियों तक भी नहीं पहुंच सकी, जिनके पांव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कुंभ के दौरान धोए थे। पीएम ने इन सफाई कर्मियों को योजना का लाभ देने की बात भी कही थी, लेकिन अब तक इनके गोल्डन कॉर्ड नहीं बन सके। हालांकि पीएमओ ने कार्ड बनवाने की कोशिश जरूर की, लेकिन सरकारी अड़चनों के चलते पीएमओ भी यह काम नहीं करा सका। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक लाभार्थियों के नाम जुड़ने की प्रक्रिया दुबारा आरंभ होने पर ही इनके कॉर्ड बनाए जा सकेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रयागराज में 24 फरवरी को कुंभ स्नान के दौरान पांच सफाई कर्मियों के पांव धुले थे। इनमें बांदा की चौबीदेवी और प्यारेलाल, कोरबा की ज्योति, संभल के होरीलाल एवं नरेश कुमार शामिल थे। भाजपा नेताओं ने इन सफाई कर्मियों को सुदामा की संज्ञा दी थी। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सफाई स्वच्छ सेवा सम्मान कोष के अलावा इन सफाई कर्मियों के लिए आयुष्मान भारत के गोल्डन कार्ड बनवाने की बात कही थी। इसके बाद मेला प्रशासन ने इन पांचों सफाई कर्मियों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिलाने के लिए गोल्डन कार्ड बनवाने की कवायद शुरू की। जब लाभार्थियों की सूची की पड़ताल हुई तब इन पांचों सफाई कर्मियों के नाम नदारद देख अधिकारी हैरान रह गए। सूची में इनके नाम न होने पर स्वास्थ्य विभाग ने हाथ खड़े कर दिए। उधर, उच्च स्तर पर मेलाधिकारी के अलावा योजना की निगरानी करने वाली स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहैंसिव (साचीज) को भी इसमें दखल देने को कहा गया। पीएमओ से जुड़ा मामला होने के चलते प्रशासनिक अमला भी इस काम को निपटाने में जुट गया, लेकिन तब तक लाभार्थी लिस्ट लॉक हो चुकी थी। अधिकारियों का कहना है कि विंडो लॉक हो जाने से उसमें कोई भी नया नाम नहीं जोड़ा जा सकता। साचीज एवं कई वरिष्ठ अधिकारियों की की कवायद का भी कोई नतीजा न निकलने पर आखिरकार पिछले महीने इससे जुड़ी फाइल बंद कर दी गई। वहीं, लॉक विंडो को दुबारा खोलने में आने वाली अड़चन के बारे में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कुछ बोलने को राजी नहीं हैं। नोडल अधिकारी डा. राहुल सिंह भी सिर्फ यही कहते हैं कि विंडो लॉक हो जाने के चलते उन सफाईकर्मियों के कॉर्ड नहीं बन सके। विंडो के दुबारा खुलने पर उनको शामिल किया जाएगा। इसकी समयसीमा के बारे में भी वह कुछ नहीं बता सके।