स्वस्वरूप रानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) में 52 वर्षीय मरीज की ट्रांसफोरामिनल लम्बर इंटरबॉडी फ्यूजन (टीएलआईएफ) स्पाइन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। ऑपरेशन के महज दूसरे दिन ही मरीज सीधा होकर चलने लगा।
स्वस्वरूप रानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) में 52 वर्षीय मरीज की ट्रांसफोरामिनल लम्बर इंटरबॉडी फ्यूजन (टीएलआईएफ) स्पाइन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। ऑपरेशन के महज दूसरे दिन ही मरीज सीधा होकर चलने लगा।
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चित्रकूट निवासी मन्नू लाल पिछले पांच माह से दर्द और चलने में कठिनाई की समस्या से पीड़ित थे। चलते के दौरान उनका ऊपरी धड़ दाईं ओर झुक जाता था। शुरूआती जांच के बाद अस्थिरोग विभाग की टीम ने टीएलआईएफ सर्जरी का निर्णय लिया।
अस्थिरोग विभाग के सहायक आचार्य डॉ. आनंद कुमार ने कहा तकनीक का उद्देश्य नसों पर दबाव कम करने के साथ रीढ़ के प्रभावित हिस्से को स्थिरता प्रदान करना है। ऑपरेशन के दूसरे दिन ही मरीज का सीधे होकर चलना उत्साहजनक है।
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सर्जरी करने वाली टीम में आनंद कुमार, सीनियर रेजिडेंट आशुतोष और जूनियर रेजिडेंट मेहुल शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में सहायक आचार्य अनिल सिंह, जूनियर रेजिडेंट विपिन और स्वाति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ओटी इंचार्ज अनुपम सिंह और विनोद ने भी सर्जरी में सहयोग दिया।
यह होती है टीएलआईएफ सर्जरी
टीएलआईएफ कमर की रीढ़ की सर्जरी है। स्क्रू और रॉड की सहायता से रीढ़ के विशेष हिस्से को स्थिर किया जाता है। डिस्क के अत्यधिक घिसने की समस्या होने पर यह सर्जरी की जाती है।
इस सफल सर्जरी में अस्थिरोग विभाग, एनेस्थीसिया विभाग और ऑपरेशन थिएटर के कर्मचारियों का समन्वित योगदान रहा है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों तक जटिल उपचार की सुविधा पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है। - डॉ. एके वर्मा, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज