कार्यवाहक कुलपति पर हमले के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (ऑटा) ने हड़ताल की चेतावनी दी तो छात्रों ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ अपना आंदोलन तेज कर दिया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ रविवार को बालसन चौराहे पर उपवास रखा और धरना-प्रदर्शन किया। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय में लोकतंत्र खतरे में है और वे इसके खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेंगे।
उपवास और धरने पर बैठे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने और सीएम का पुतला फूंकने पर छात्रसंघ अध्यक्ष अदील हमजा पर चीफ प्रॉक्टर धार्मिक आरोप लगाते हैं, ज्ञापन देने पर डीन आर्ट्स कला संकाय के प्रतिनिधि चंद्रशेखर के लिए जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद पुलिस छात्रों पर मुकदमा दर्ज कर रही है और छात्रों की तहरीर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। छात्र चीफ प्रॉक्टर के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर देंगे।
विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार और कुलपति पर देशद्रोह के आरोप के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे छात्र अब पीछे हटने वाले नहीं। वरिष्ठ छात्रनेताओं ने कहा कि प्रशासनिक पदों पर बैठे शिक्षकों के दुर्व्यवहार को देखते हुए छात्र खुद डिग्री वापस करने पर विचार कर रहे हैं। ऑटा निजी स्वार्थ के लिए हड़ताल पर जाता है। कक्षाएं और पठन-पाठन सुचारु रूप से चले इसके लिए छात्रसंघ प्रतिबद्ध है। जरूरत पड़ी तो छात्रों के लिए छात्रसंघ भवन में क्लास चलाई जाएगी। धरने में छात्र नेता विवेकानंद पाठक, अदील हमजा, विक्रांत सिंह, आनंद सिंह, अखिलेश गुप्ता, अजीत विधायक, अविनाश दुबे, अंकुश यादव, हरीनाम सिंह, नीरज सिंह, अवनीश विद्यार्थी, अवनशी यादव, प्रशांत समाजसेवी, चंद्रशेखर चौधरी, अभिषेक यादव आदि मौजूद रहे।