प्रतियोगी छात्रों ने लोक सेवा आयोग के खिलाफ अपनी लड़ाई एक बार फिर तेज कर दी है। आयोग की कार्यप्रणाली और विवादित भर्तियों की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग को लेकर प्रतियोगियों ने एकजुटता दिखाते हुए शनिवार शाम कैंडल मार्च निकाला।
‘आयोग की अब एक दवाई, सीबीआई-सीबीआई’ जैसे नारे लगाते हुए प्रतियोगी छात्रों ने वरिष्ठ समाजसेवी रतन दीक्षित के नेतृत्व में लक्ष्मी टॉकीज चौराहा से कैंडल मार्च शुरू किया। कैंडल मार्च विश्वविद्यालय मार्ग, कचहरी, लोक सेवा आयोग होते हुए सिविल लाइंस सुभाष चौराहे पर समाप्त हुआ। समापन स्थल पर प्रतियोगियों ने इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने की सामूहिक रूप से शपथ ली। प्रतियोगियों ने उम्मीद जताई कि प्रदेश में भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले युवाओं को प्रदेश सरकार निराश नहीं करेगी और चुनाव से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने जो वादा किया, सत्ता में आने के बाद उसे पूरा करेंगे। तय हुआ कि जल्द ही एक प्रतिनिमंडल मुख्यमंत्री से मिलेगा और आयोग की कार्यप्रणाली की सीबीआई जांच की मांग को लेकर उन्हें ज्ञापन देगा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में वॉश आउट की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों ने शनिवार कैंडल मार्च निकाला। इनमें बड़ी संख्या छात्राओं की थी। कैंडल मार्च छात्रसंघ भवन से शुरू हुआ और चंद्रशेखर आजाद पार्क के सामने समाप्त हुआ।
छात्रों ने हॉस्टल के मुद्दे पर विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें चेतावनी दी। कैंडल मार्च के आयोजित सभा में छात्रसंघ उपाध्यक्ष अदील हमजा ने आरोप लगाया कि कुलपति भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अक्षमता को छिपाने के लिए तानाशाही की आड़ ले रहे हैं। शर्मनाक है कि विश्वविद्यालय जल रहा है और वीसी सैर पर निकले हैं। छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने कहा कि हमारी लड़ाई सच्चाई और न्याय की है। हम तानाशाही का प्रतिकार करना और विजय पाना जानते हैं। छात्र हित में अंतिम सांस तक संघर्ष करते रहेंगे। कैंडल मार्च में छात्र नेता अजीत यादव, अखिलेश गुप्ता, मानस शर्मा, आनपंद सिंह, नीरज प्रताप सिंह, हरिनाम सिंह, अवनीश यादव, उदय यादव, सूर्य प्रकाश मिश्र, मोहम्मद इमदाद, अदनान आदि मौजूद रहे।