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Prayagraj : जबरन धर्मांतरण पर सख्ती आ रही काम, मामलों में गिरावट, पिछले साल दर्ज हुए सिर्फ दो मुकदमे

Sun, 03 Aug 2025 05:22 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जिले में धर्मांतरण को लेकर पांच वर्षों में दर्ज हुए 27 मामलों और 40 आरोपियों की गिरफ्तारी ने कानून व्यवस्था की दिशा में एक नई तस्वीर पेश की है। इन आंकड़ों का एक दूसरा पहलू यह भी है कि बीते दो वर्ष में ऐसे मामलों में गिरावट देखी गई है।
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एफआईआर - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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जिले में धर्मांतरण को लेकर पांच वर्षों में दर्ज हुए 27 मामलों और 40 आरोपियों की गिरफ्तारी ने कानून व्यवस्था की दिशा में एक नई तस्वीर पेश की है। इन आंकड़ों का एक दूसरा पहलू यह भी है कि बीते दो वर्ष में ऐसे मामलों में गिरावट देखी गई है। अफसर इसे प्रशासनिक सतर्कता और कड़ी निगरानी का परिणाम मान रहे हैं।

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जबरन धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति साफ दिख रही है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच सबसे अधिक मामले वर्ष 2023 में सामने आए थे जब एक साल में नौ मामले दर्ज हुए। इसके बाद 2024 और 2025 की पहली छमाही में ऐसे मामलों में गिरावट दर्ज हुई है।

2024 में जहां छह मामले जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में सामने आए। वहीं मौजूदा साल के आठ महीनों में ऐसी दो घटनाएं ही सामने आई हैं। इससे पहले 2021 में चार और 2022 में छह मामले दर्ज किए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि लगातार प्रभावी कार्रवाई, खुफिया निगरानी और जीरो टॉलरेंस की नीति के चलते यह बदलाव आया है।
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21 मामलों में विवेचना पूरी, लगी चार्जशीट

पिछले पांच वर्षों में जिले में दर्ज धर्मांतरण के मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर सक्रियता दिखाई गई। साथ ही विवेचना का भी तेजी से निस्तारण किया गया। 2021 से अब तक दर्ज 27 मामलाें में से 21 की विवेचना पूरी कर इसमें आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगाई जा चुकी है। एक मामले में साक्ष्य न मिलने पर अंतिम रिपोर्ट लगाई गई जबकि पांच मामलों में विवेचना प्रचलित है।

यह बेहद गंभीर प्रकरण है और इससे संबंधित सभी मामलों की गहनता से जांच कराई जाती है। प्रकरण से संबंधित सभी कड़ियों को जोड़ते हुए एक-एक बिंदु पर साक्ष्य जुटाकर कार्रवाई की जाती है। त्वरित कार्रवाई व सक्रियता का नतीजा है कि ऐसे मामलों में कमी आई है। आगे भी संबंधित प्रकरणों को लेकर बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिन मामलों में विवेचना पूरी हो चुकी है, उनमें प्रयास यही है कि प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाई जाए। - डॉ. अजयपाल शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त, कानून व्यवस्था

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