गंगापार के सीमा विस्तारित क्षेत्र झूंसी के विभिन्न वार्डों में आवारा कुत्तों के आतंक से लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। यहां की आवास विकास कालोनी योजना तीन के कुल 11 सेक्टरों में सैकड़ों की संख्या में आवारा कुत्तों ने अपना डेरा जमा रखा है।
कुत्तों के डर से लोग बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने देते। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए भी आवारा कुत्ते ऑफत बने हुए हैं। कई बार आवारा कुत्तों ने राहगीरों पर हमला भी कर दिया है। झूंसी निवासी विजय कुमार, ज्ञानेंद्र अवस्थी, तेज प्रकाश मिश्र, अनुराग अग्रवाल, विनीत श्रीवास्तव आदि ने बताया कि कुत्तों के डर से वे बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने स्वयं जाते हैं। बच्चे भी अकेले घर से बाहर निकलने से घबराते हैं।
लोगों ने बताया कि नगर निगम प्रशासन से कई बार पोर्टल के जरिए आवारा कुत्तों की धरपकड़ की मांग की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। पिछले दस दिनों के भीतर कई बुजुर्ग और बच्चे आवारा कुत्तों के हमले का शिकार भी हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि रात के समय घर लौटते वक्त आवारा कुत्तों का झुंड दो पहिया वाहनों को दौड़ा लेते हैं, जिससे कई लोग गिरकर जख्मी भी हो चुके हैं।
झूंसी के रजत, राजू, तौहीद खान, तनवीर आदि ने बताया कि वे नगर निगम के अधिकारियों को कई बार आवारा कुत्तों को पकड़ने की मांग कर चुके हैं लेकिन कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस बारे में पशुधन अधिकारी डॉ.विजय कुमार का कहना है कि एक-दो दिन में झूंसी की कालोनियों में अभियान चलाकर आवारा कुत्तों की धरपकड़ की जाएगी।
दो साल पहले आवारा कुत्तों के हमले में मारे गए दो दर्जन हिरन
तकरीबन दो साल पहले आवारा कुत्तों के झुंड ने झूंसी के छतनाग स्थित बिरला गेस्ट हाऊस के भीतर बाड़े में पाले गए हिरनों पर रात के अंधेरे में हमला कर दिया था। इसमें दो दर्जन के आसपास हिरनों की मौत हो गई थी। घटना की जानकारी दूसरे दिन हुई तो खलबली मच गई। पूरे प्रकरण में बिरला गेस्ट हाऊस के कुछ कर्मचारियों को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। इसके बावजूद आवारा कुत्तों को लेकर नगर निगम के पशुधन विभाग की उदासीनता समझ से परे है।