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अनियमित रूप से आवंटित पट्टा फर्जी नहीं

Thu, 12 May 2016 02:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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हाईकोर्ट ने कहा है कि पट्टे के आवंटन में अनियमितता बरतने के आधार पर उसे फर्जी नहीं करार दिया जा सकता है। कोर्ट का मानना है कि फर्जी और अनियमित या अवैध में काफी अंतर है तथा अवैध रूप से आवंटित पट्टे को फर्जी करार नहीं दे सकते हैं। इस आधार पर कोर्ट ने 20 वर्ष पूर्व आवंटित पट्टे को एकतरफा कार्रवाई के आधार पर निरस्त करने के एसडीएम गाजियाबाद के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि एकतरफा आदेश से नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का हनन होता है।
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गाजियाबाद के नूर मोहम्मद की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एपी साही और न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया है। प्रकरण के अनुसार ग्राम पंचायत कलछीना गाजियाबाद द्वारा 16 जून 1984 को प्रस्ताव पारित कर 23 लोगों को पट्टे का आवंटन कर दिया। इसे परगनाधिकारी ने अनुमति भी प्रदान कर दी। राजस्व रिकार्ड में आवंटियों ने अपने नाम दर्ज करा लिए। 2005 में इसकी शिकायत होने पर एसडीएम ने पट्टा निरस्त कर दिया। इसके खिलाफ अपील भी अपर आयुक्त ने खारिज कर दी। पट्टा धारकों ने एसडीएम और अपर आयुक्त के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि एसडीएम ने एकपक्षीय आदेश पारित किया है। याचीगण का पक्ष सुना नहीं गया। पट्टा निरस्त करने का अधिकार एसडीएम को नहीं है, यह अधिकार कलेक्टर का है। पट्टा अवैध होने के संदेह मात्र पर इसे फर्जी नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने एसडीएम के आदेश को रद्द करते हुए सक्षम प्राधिकारी को नए सिरे से पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई का आदेश दिया है। 
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