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इविवि में ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा पर समिति की मुहर

Thu, 12 May 2016 02:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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बुधवार को इविवि यूनियन हाल के सामने विभिन्न मांगों को लेकर कुलपति का पुतला फूंकते एबीवीपी कार्यकर्ता। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों के लिए ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा का विकल्प दिए जाने के फैसले पर कमेटी ऑफ एडमिशन ने भी मोहर लगा दी। बुधवार को हुई बैठक में इसका फैसला लिया गया। खास यह कि पूर्व में आवेदन कर चुके विद्यार्थियों को ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प भरने के लिए मौका तो दिया ही जाएगा, नए विद्यार्थी भी आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए विद्यार्थियों को एक सप्ताह का मौका दिया जाएगा। एक-दो दिनों में आवेदन तथा विकल्प मांगे जाने की तारीख की घोषणा कर दी जाएगी। हालांकि, आवेदन तथा विकल्प ऑनलाइन ही मांगे जाएंगे।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने सिर्फ स्नातक प्रवेश परीक्षा (यूजीएटी) में ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन का विकल्प दिया था। परास्नातक समेत अन्य सभी पाठ्यक्रमों के लिए सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया था। इसके विरोध में छात्रसंघ पदाधिकारियों के नेतृत्व में लंबा आंदोलन चला। आंदोलन को सभी दलों के नेताओं, सांसदों, विधायकों का समर्थन मिला, जिसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। इस बाबत मंत्रालय की ओर से मंगलवार को विश्वविद्यालय को पत्र लिखा गया था। इसी परिप्रेक्ष्य में बुधवार को कमेटी ऑफ एडमिशन की बैठक में सभी पाठ्यक्रमों के लिए ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा का विकल्प देने का निर्णय लिय गया। चूंकि, आवेदन की आखिरी तारीख नौ मई को ही बीत चुकी है। इसलिए नए सिरे से नोटिफिकेशन तथा कार्यक्रम घोषित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा ऑफलाइन के विकल्प का कॉलम जोड़ने के लिए फार्म के प्रारूप में भी बदलाव किया जाएगा। आगे चलकर किसी तरह का विवाद न हो इसलिए समिति ने नए विद्यार्थियों से भी आवेदन लेने का निर्णय लिया है। प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. बीएन सिंह ने बताया कि प्रवेश कराने वाली संस्था टीसीएस से वार्ता हो चुकी है। आवेदन तथा विकल्प कब से लिया जाना है, इस पर एक-दो दिनों में निर्णय ले लिया जाएगा। बताया कि इसके लिए विद्यार्थियों को नोटिफिकेशन वाले दिन से सात दिन का समय दिया जाएगा। ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा के लिए प्रदेश के सभी जिलाें को सेंटर बनाया गया है। प्रदेश के बाहर भी ज्यादातर प्रदेश में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन ऑफलाइन का विकल्प भरने वालों के लिए केंद्र के विकल्प सीमित हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि जिन जिलों में यूजीएटी में ऑफलाइन परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया है, उन्हीं जिलों में अन्य पाठ्यक्रमों की भी ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी। प्रो. बीएन सिंह ने बताया कि इस बदलाव की वजह से प्रवेश की पूरी प्रक्रिया तकरीबन 20 से 25 दिन आगे बढ़े जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 25 से 30 मई के बीच प्रवेश परीक्षा कराने की घोषणा की थी लेकिन अब यूजीएटी को छोड़कर अन्य पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा 20 से 25 जून के बीच संभावित है।

स्नातक प्रवेश परीक्षा 25 और 26 मई को
इविवि की स्नातक प्रवेश परीक्षा अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी पाठ्यक्रमों के लिए 25 से 30 मई के बीच प्रवेश परीक्षा कराने का निर्णय लिया था। स्नातक में शामिल बीएससी, बीए, बीकॉम, बीएफए और बी.म्यूज की प्रवेश परीक्षाएं 25 और 26 मई को तय हैं। प्रो. बीएन सिंह ने बताया कि यूजीएटी के आवेदन प्रारूप में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए ये परीक्षा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 25 और 26 मई को ही कराई जाएंगी। यूजीएटी की अन्य प्रक्रिया भी पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार ही पूरी की जाएगी। 
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कुलपति के समर्थन में आए इविवि और कालेज के शिक्षक
ऑफलाइन के मुद्दे पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हस्तक्षेप पर कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू के बयान के समर्थन में इलाहाबाद विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों के शिक्षक भी आ गए हैं। अलग-अलग बैठकों में शिक्षकों ने कुलपति के फैसलों का समर्थन करने के साथ ऑफलाइन के मुद्दे पर नेताओं के हस्तक्षेप की कड़े शब्दों में निंदा की। शिक्षकों ने इसे विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का अतिक्रमण बताया।

विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (आटा) की बैठक में शिक्षकों का कहना था कि सांसद, विधायक या किसी अन्य को उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सदस्य इस तरह के हस्तक्षेप का विरोध करते हैं। बैठक में कुलपति पद की गरिमा का हनन करने वाले नकारात्मक प्रयासों की निंदा का प्रस्ताव पारित किया गया। उन्होंने छात्र प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों से भी रचनात्मक योगदान की अपील की। बैठक में उपाध्यक्ष डॉ.लालसा यादव, महामंत्री प्रोफेसर शिव मोहन प्रसाद आदि मौजूद रहे।

संघटक कालेज शिक्षक संघ की बैठक में कुलपति के फैसलों का स्वागत किया गया। उनका कहना था कि चार महीने में कुलपति ने विश्वविद्यालय और कालेजों के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि कुलपति को तनावमुक्त माहौल में काम करने का मौका दिया जाए। शिक्षकों ने सरकार से भी अपील की कि विश्वविद्यालय में हस्तक्षेप से बचें। बाहरी हस्तक्षेप रोकने के लिए शिक्षकों ने जनप्रतिनिधियों से संपर्क करने की भी घोषणा की। बैठक में कुलपति और शिक्षकों के साथ हुए दुर्व्यवहार की भी निंदा की गई। बैठक में अध्यक्ष डॉ.सुनील कांत मिश्रा, महासचिव डॉ.उमेश प्रताप सिंह, डॉ.रेखारानी, डॉ.धीरेंद्र द्विवेदी, डॉ.राजेश कुमार गर्ग आदि मौजूद रहे। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने भी प्रोफेसर हांगलू के रुख का समर्थन किया है। उनका कहना है कि शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक दखलांदजी बंद होनी चाहिए। यह संस्थान की स्वायत्तता के लिए जरूरी है। लैपटाप बांटने वाले और डिजिटल इंडिया की बात करने वाले ही ऑनलाइन परीक्षा का विरोध कर रहे हैं। शिक्षक प्रोफेसर हांगलू का पूरा समर्थन करते हैं।

कुलपति को छुट्टी पर भेजकर जांच कराने की मांग
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की अध्यक्ष ऋचा सिंह ने कुलपति पर परिसर का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। ऋचा ने कुलपति को छुट्टी पर भेजकर उनके कार्यकाल में हुए फैसलों तथा नियुक्तियाें की जांच की मांग की है। ऋचा का कहना है कि ऑफलाइन के मुद्दे पर छात्रों ने एकजुट होकर संघर्ष किया, लेकिन कुलपति इसका राजनीतिकरण करके नियुक्ति में अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ी आदि मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहते हैं। विवादित बयानों पर नाराजगी जताते हुए एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने भी बुधवार को कुलपति का पुतला दहन किया। छात्रसंघ भवन पर जुटे छात्रों और कार्यकर्ताओं का कहना था कि कुलपति राष्ट्रवादी संगठनों को निशाना बनाना बंद करें। पुतला दहन करने वालों में छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, सूर्य प्रकाश मिश्र, ज्ञान शुक्ला, श्याम प्रकाश पांडेय आदि शामिल रहे।
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