जांच के दौरान पता चला कि उसका पंजीयन निलंबित है। इसके बाद भी स्कूल संचालक बच्चों की जान खतरे में डालकर वाहन का उपयोग कर रहे हैं। बच्चों से भरी बस कार्यालय लेकर आए। करीब 22 मिनट तक धूप में बस खड़ी कराकर रखी गई। इस बीच खुद को बच्चे का अभिभावक बताने वाले अंकित सिंह समेत अन्य लोगों ने हंगामा किया।
चेकिंग के दौरान बच्चों से भरी स्कूली बस पकड़कर कार्यालय लाकर 22 मिनट तक खड़ी करना एआरटीओ प्रवर्तन को महंगा पड़ गया। रिपोर्ट मिलने के बाद परिवहन आयुक्त ने कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई हो गई। शासन के निर्देश पर उप संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन दिलीप गुप्ता सोमवार को वाहनों संग स्कूली बसों की जांच कर रहे थे। गड़वारा मोड़ पर बिहारगंज जैतीपुर में संचालित स्कूल की बस बच्चों को घर छोड़ने जाते समय मिल गई।
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जांच के दौरान पता चला कि उसका पंजीयन निलंबित है। इसके बाद भी स्कूल संचालक बच्चों की जान खतरे में डालकर वाहन का उपयोग कर रहे हैं। बच्चों से भरी बस कार्यालय लेकर आए। करीब 22 मिनट तक धूप में बस खड़ी कराकर रखी गई। इस बीच खुद को बच्चे का अभिभावक बताने वाले अंकित सिंह समेत अन्य लोगों ने हंगामा किया। जिसके बाद उसी बस से बच्चों को घर तक छोड़ा गया। बाद में उसे सीज करते हुए 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
मामला संज्ञान में आने के बाद परिवहन आयुक्त सीबी सिंह ने जांच के लिए आरटीओ प्रवर्तन प्रयागराज को भेजा। स्कूल संचालक व शिक्षिकाओं का बयान दर्ज करने के बाद यह सामने आया कि बच्चों से भरी बस को 22 मिनट तक कार्यालय में रोका गया। धूप में बच्चे भी बस में ही बैठे रहे। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बुधवार को परिवहन आयुक्त सीबी सिंह ने एआरटीओ के संवेदनशून्यता पर नाराजगी जाहिर की।
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विधायक सदर ने भी जताई नाराजगी
सदर विधायक राजेंद्र मौर्य ने भी प्रकरण पर गहरी नाराजगी जताई। कहा कि बच्चों से भरी बस को कार्यालय ले जाकर धूप में खड़ा कराना गलत है। इसका बच्चों के मन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।