शुक्रवार को भी जारी रहा गिरावट का दौर
एक अनुमान के मुताबिक जिले में आठ हजार से अधिक निवेशक शेयर, म्यूचुअल फंड व कमोडिटी एक्सचेंज के हैं। पिछले सप्ताह आरबीआई द्वारा अचानक से रेपो रेट बढ़ा दिए जाने समेत कई अन्य वजहों से शेयर बाजार खासा प्रभावित हुआ है। अल्लापुर के शेयर निवेशक प्रवीण कुशवाहा ने बताया कि बाजार में आई गिरावट की वजह से इस बार उनको काफी नुकसान हुआ। शेयर बाजार के विशेषज्ञ आशीष गुप्ता ने बताया कि शुक्रवार को भी बाजार में गिरावट का दौर जारी रहा।
निवेशकों को उम्मीद थी कि बाजार अपनी लय पकड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक अनुमान के मुताबिक बीते एक सप्ताह में निवेशकों के 600 करोड़ डूब चुके हैं। बृहस्पतिवार के मुकाबले शुक्रवार को सेंसेक्स 136.69 अंक यानी 0.25 प्रतिशत टूटकर 52,793.362 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 25.85 अंक यानी 0.16 प्रतिशत टूटकर 15,782.15 पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों ने कहा, अभी जारी रह सकती है गिरावट
मम्फोर्डगंज निवासी एवं शेयर बाजार के विशेषज्ञ राजीव वार्ष्णेय बताते हैं कि अमेरिका में महंगाई दर के जो आंकड़े आए हैं, उसे लेकर वहां भी शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। आरबीआई द्वारा रेपो दर बढ़ाने के बाद अमेरिका की फेड रिजर्व ने ब्याज दरों में 0.5 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी। युक्रेन-रूस खत्म होने का भी कोई संकेत नहीं दिख रहा है। ऐसे में कई मामलों में सप्लाई घट गई है। इसी वजह से महंगाई भी बढ़ी है। राजीव ने बताया कि बीते एक सप्ताह के दौरान शेयरों में आई गिरावट की वजह से उनके जानने वाले तमाम लोगों के लाखों रुपये डूब चुके हैं।
आरबीआई का एकदम से रेपो रेट बढ़ाना, क्रूड ऑयल का 100 डॉलर के ऊपर होना समेत कई वजह भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में निवेशकों धैर्य रखें। गिरावट के दौरान थोड़ा-थोड़ा निवेश बेहतर परिणाम दे सकता है। - अजय कुमार गुप्ता, शेयर बाजार विशेषज्ञ
शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव का दौर है। विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। हालांकि निवेशकों को इस गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है। उन्हें छोटा निवेश करते रहना चाहिए। - प्रतीक मालवीय, कर एवं वित्त सलाहकार एवं शेयर विशेषज्ञ
यूक्रेन, रूस को लेकर वैश्विक बाजार में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। इस युद्ध का असर यूरोप, अमेरिका हीं नहीं, बल्कि हमारे देश पर भी पड़ा है। निवेशक विवेक, संयम और धैर्य दिखाएं। हमेशा ऐसी स्थिति नहीं रहने वाली। - प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी, अर्थशास्त्री एवं पूर्व कुलपति बीएचयू।