बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की पहली महिला अध्यक्ष दरवेश यादव की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु से खाली हुए पद को भरने की कवायद शुरू हो चुकी है। इस मसले पर विचार करने के लिए 15 जून को बार कौंसिल सदस्यों की बैठक बुलाई गई है। कौंसिल के नियमोें के अनुसार नया अध्यक्ष चुनने में कई पेच हैं। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि आपसी सहमति से इस मसले का कोई न कोई हल निकाल लिया जाएगा।
जानकारों की मानें तो एडवोकेट्स एक्ट 1961 की धारा 15(2)(सी) में बार कौंसिल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव संबंधी नियम तय किए गए हैं। इन नियमों को बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने अनुमोदित किया है। लिहाजा, ये बाध्यकारी नियम हैं। नियम 15 (2)(जी) में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के अधिकारों का वर्णन है। इनका कार्यकाल एक वर्ष का होगा और अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष उनके पद के दायित्व का निर्वहन करेगा।
नौ जून को हुए बार कौंसिल अध्यक्ष के चुनाव में संयोगवश अध्यक्ष पद के दोनों दावेदारों दरवेश यादव और हरिशंकर सिंह को बराबर मत मिले। सदस्यों की आपसी सहमति से दोनों का कार्यकाल छह-छह माह तय कर दिया गया। पहले छह महीने दरवेश का कार्यकाल था। चूंकि, इस व्यवस्था का किसी सदस्य ने विरोध नहीं किया और बीसीआई ने भी इसकी पुष्टि कर दी, लिहाजा दरवेश के छह माह के कार्यकाल के लिए अब नया अध्यक्ष चुनना होगा। कौंसिल के नियमों के अनुसार अध्यक्ष के रिक्त पद पर उपाध्यक्ष को दायित्व निर्वहन का अधिकार है। ऐसी स्थिति में रिक्त पद पर क्या व्यवस्था होगी यह अब कौंसिल सदस्यों को तय करना है। सदस्यों की सहमति बनी तो हरिशंकर सिंह को पूरे वर्ष के लिए अध्यक्ष बनाया जा सकता है या फिर छह माह के लिए नया चुनाव कराया जा सकता है।
सहमति से होगा विचार: बीके श्रीवास्तव
बार कौंसिल के पूर्व अध्यक्ष और सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता बीके श्रीवास्तव का कहना है कि कौंसिल के नियमों को ध्यान में रखते हुए आपसी सहमति से सभी संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। 15 जून को इस पर विचार करने के लिए बैठक बुलाई गई है।
एक वर्ष का ही होता है कार्यकाल: वीसी मिश्र
बार कौंसिल ऑफ इंडिया और बार कौंसिल ऑफ यूपी के चेयरमैन रह चुके वरिष्ठ अधिवक्ता वीसी मिश्र का कहना है कि बार कौंसिल के नियमों के अनुसार अध्यक्ष का कार्यकाल एक वर्ष का होता है। छह माह के कार्यकाल का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए नया अध्यक्ष चुनने के लिए नए सिरे से चुनाव प्रक्रिया अपनानी होगी।