इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहुचर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे के साथी पंकज दीक्षित के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों के गठजोड़ से फर्जीवाड़े, रंगदारी वसूली के आरोप में लंबित आपराधिक कार्यवाही पर सरकार से जवाब तलब किया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहुचर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे के साथी पंकज दीक्षित के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों के गठजोड़ से फर्जीवाड़े, रंगदारी वसूली के आरोप में लंबित आपराधिक कार्यवाही पर सरकार से जवाब तलब किया है। साथ ही अधिवक्ता पंकज दीक्षित के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति चवन प्रकाश की एकल पीठ ने दिया है।
विज्ञापन
मामला कानपुर नगर के किदवई नगर थाना क्षेत्र का है। 2025 में वकील, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के एक बड़े संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ था। आरोप था कि कानपुर कचहरी के अधिवक्ता अखिलेश दुबे के नेतृत्व में यह गिरोह लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाकर उनकी संपत्तियों पर कब्जा करने का काम करता था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया था, जिसके बाद कई एफआईआर दर्ज हुईं और केडीए व पुलिस के कई अधिकारियों पर गाज गिरी थी।
मामले में सह आरोपी अधिवक्ता पंकज दीक्षित के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल हुआ था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 2015 की घटना से जुड़ी एफआईआर 2025 में दर्ज हुई है। इससे पहले हाईकोर्ट ने याची की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।