यह है मामला
अपनी याचिका में यामीन ने आरोप लगाया कि 24 नवंबर, 2024 को सुबह लगभग 8:45 बजे, उनका बेटा आलम संभल के मोहल्ला कोट क्षेत्र में जामा मस्जिद के पास अपनी ठेली पर रस्क और बिस्कुट बेच रहा था, तभी नामजद पुलिस अधिकारियों ने भीड़ पर जान से मारने की नीयत से अचानक गोलियां चला दीं। यामीन की याचिका में संभल के तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और संभल कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार तोमर का नाम है। अपने 11 पृष्ठ के आदेश में सीजेएम सुधीर ने टिप्पणी की थी कि पुलिस आपराधिक कृत्यों के लिए आधिकारिक कर्तव्य का बहाना नहीं बना सकती। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए सीजेएम ने कहा कि किसी व्यक्ति पर गोली चलाना आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं माना जा सकता। प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध होने की संभावना को देखते हुए, मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि सच्चाई का पता केवल उचित जांच के माध्यम से ही लगाया जा सकता है।