इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में संविधान की मंशा के विपरीत पंचायती राज कानून की वैधता को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई 20 नवंबर को होगी। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने जौनपुर के नवापुर गांव के निवासी मुकेश सिंह की याचिका पर दिया है।
याचिका में उप्र पंचायत राज नियमावली 1947 के नियम 35 का हवाला देते हुए याची अधिवक्ता ने कहा कि ग्राम सभा की कार्यवाही पर हस्ताक्षर न होना, जनतंत्र की ग्राम्य इकाई में प्रस्ताव पर विचार हुआ या नहीं, एक दूषित व्यवस्था है। 73 वें संविधान संशोधन से पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया गया है। इसके मुताबिक ग्राम सभा एक स्वायत्त लोकतांत्रिक इकाई है। कुछ रेग्यूलेटरी व सुपरवाइजरी चेक के अतिरिक्त ग्राम पंचायत को संवैधानिक स्वायत्तता का दर्जा प्राप्त है।
उप्र पंचायत राज अधिनियम पंचायती राज व्यवस्था के अनुरूप नहीं है और संविधान की जनतंत्र की बेसिक इकाई स्थापित करने की मंशा को पूरा नहीं करता। संविधान की मूल भावना के अनुरूप प्रदेश में पंचायती राज स्थापित करने की याचिका में मांग की गई है।