एसएमसी की छात्रा जेना हुसैन का प्रीतमनगर अबूबकरपुर स्थित नानी का घर। इसी घर में जैना का ज्यादातर समय व्यतीत होता था।
- फोटो : अमर उजाला।
परिवारीजनों ने पुलिस को सूचना दिए बिना ही अबूबकरपुर कब्रिस्तान में दफना दिया था। धूमनगंज इंस्पेक्टर अमरनाथ राय ने भी बताया कि उन्हें सुसाइड की कोई जानकारी नहीं दी गई। इसी कारण घटनास्थल की जांच भी नहीं कर पाया। सुसाइड नोट में बेहद गंभीर आरोप होते हुए भी जेना के माता-पिता ने कोई टिप्पणी नहीं की है।
वहीं, जेना के बड़े मामू टीपू मिर्जा बताते हैं कि घटना के दिन से ही बहन सूफिया गहरे सदमे में हैं। उन्हें नींद नहीं आ रही है। इसके लिए गोलियां और इंजेक्शन देने पड़ रहे हैं। दोनों की हालत देखकर उन्हें अपने घर ले आए हैं। सेंट मैरीज स्कूल की पुलिस से शिकायत क्यों नहीं की, इस पर टीपू मिर्जा कहते हैं, अभी परिवार संभाल रहा हूं।
जेना अपने घर से लेकर ननिहाल तक इकलौती बेटी होने के नाते सबकी दुलारी थी। वह अपनी मां मुनीश फातिमा संग जेना की तस्वीर दिखाते हुए फफक पड़ते हैं। कहते हैं, जाने दीजिए। अब इस तकलीफ को आगे बढ़ाने से कुछ हासिल होने वाला नहीं है।
सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल।
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ससुराल नहीं लौटना चाहतीं सूफिया रशीद
जेना की मां सूफिया रशीद बेटी को खोने के बाद से गहरे सदमे में हैं। वह बार-बार विचलित हो जा रही हैं। टीपू मिर्जा बताते हैं कि बहन सूफिया रशीद अब ससुराल नहीं लौटना चाहतीं। उन्होंने फैसला किया है कि जिस घर में इकलौती बेटी को गंवा दिया, वहां वह दोबारा कदम नहीं रखना चाहती। लिहाजा, अब मायके में ही रहने का फैसला किया है।
मुझे भी कब्र में ही दफना दो...:
टीपू मिर्जा बताते हैं कि मिट्टी देने के दौरान सूफिया कब्रिस्तान में ही लेट जा रही थीं। कह रही थीं, मुझे भी जेना की कब्र के ही पास दफना दो। किसी तरह उन्हें संभाला गया। बेटी की मौत के नौ दिन बाद भी उसके अब्बू अरफत खान ने चुप्पी नहीं तोड़ी। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने उनसे मिलने की कोशिश की, लेकिन वह सामने नहीं आए।
धूमनगंज पुलिस परिजनों से मिली थी, लेकिन उन्होंने कोई तहरीर नहीं दी है। शिकायत का इंतजार है, इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अभिषेक भारती, डीसीपी नगर