केंद्रीय सुरक्षा बलों सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, बीएसएफ सहित अन्य में सिपाही के पदों पर 2011 में हुई भर्ती में खाली 28 हजार पदों को भरने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे पांच अभ्यर्थियों को पुलिस शनिवार को आधी रात के बाद धमकी देने के साथ थाने उठा ले गई। दिन में उनका अनशन जबरन तोड़वाने के बाद 12 बजे छोड़ दिया। अनशनकारियों को पकड़े जाने के बाद उनके दूसरे पांच साथी अनशन पर बैठ गए। छात्रों का कहना है कि एसएससी की ओर से उनकी बातों को कोई नहीं सुन रहा है। अनशन को समर्थन देने प्रदेश के कोने-कोने से अभ्यर्थी पहुंच रहे हैं।
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि आमरण अनशन के सात दिन बाद भी आयोग की ओर से बातचीत करने कोई भी आगे नही आया है। केंद्रीय पुलिस भर्ती के अभ्यर्थियों का कहना है कि स्थानीय पुलिस लगातार अनशन खत्म करने का दबाव बना रही है। अभ्यर्थियों को धमकी दी जा रही है कि उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसा दिया जाएगा। स्थानीय थाने की पुलिस ने रविवार शाम को अभ्यर्थियों को एक बार फिर धमकी दी कि जल्दी से यहां से हट जाओ नहीं तो बल प्रयोग करके भगा दिया जाएगा।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके कई साथी अब तक अस्पताल में भर्ती कराए जा चुके हैं। अभ्यर्थी सोमवार को 11.30 बजे एसएससी के क्षेत्रीय निदेशक को ज्ञापन सौपेंगे। अनशनकारियों को समर्थन देने रविवार को कई राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संगठनों के सदस्य भी आगे आए हैं। इसमें आम आदमी पार्टी के अंजनी कुमार मिश्र, कांग्रेस के मुकुंद तिवारी, भाजपा के राणा यशवंत प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं।