सिपाही भर्ती के परिणाम में अनियमितता को लेकर मंगलवार को भी अभ्यर्थियों का धरना-प्रदर्शन जारी रहा। उनका कहना है कि लिखित परीक्षा में अच्छी मेरिट होने के बावजूद उनको मेडिकल परीक्षण के चयन से बाहर कर दिया गया। परीक्षार्थियों ने परीक्षा के अंक जारी करने की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। इससे पहले छात्रों ने एक ज्ञापन आयोग को सौंपा।
दो फरवरी को एसएससी की ओर से रिजल्ट जारी होेने के बाद छह फरवरी को सीआरपीएफ ने अभ्यर्थियों की मेरिट के आधार पर उनको सुरक्षा बल आवंटित कर दिए। इसकी सूचना वेबसाइट पर जारी कर दी गई। सिपाही भर्ती परीक्षा के परिणाम को लेकर शिकायत करने पहुंचे अभ्यर्थियों का कहना है कि नक्सल प्रभावित जिले का होने के बाद भी उन्हें उसका वेटेज नहीं दिया गया। परिणाम को लेकर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी शिकायत नहीं सुनी गई तो वे कोर्ट जाएंगे। वहीं सीआरपीएफ का कहना है कि अभ्यर्थियों की ओर से उपलब्ध डाटा के आधार पर ही मेरिट तैयार की गई है। बता दें कि अब तक 400 से अधिक शिकायतें एसएससी मध्य क्षेत्र कार्यालय में पहुंच चुकी हैं।
एसएससी से नहीं सीआरपीएफ से करें शिकायत
एसएससी की ओर से हुई सिपाही भर्ती परीक्षा के परिणाम को लेकर अभ्यर्थी लगातार मध्य क्षेत्र कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इस संबंध में सीआरपीएफ के डीआईजी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा के बाद एसएससी की जिम्मेदारी खत्म हो गई है। अभ्यर्थी किसी प्रकार की आपत्ति के लिए सीआरपीएफ से संपर्क करें। इसमें एसएससी की कोई भूमिका नहीं है। सीआरपीएफ के डीआईजी शैलेंद्र की ओर से जारी पत्र एसएससी मध्य क्षेत्र कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर लगा दिया गया है। एसएससी कार्यालय पर बीते तीन दिन से धरना-प्रदर्शन को देखते हुए सीआरपीएफ के डीआईजी भर्ती ने यह स्पष्टीकरण जारी किया है। सीआरपीएफ की ओर से जारी मेरिट अभ्यर्थियों की ओर से उपलब्ध कराए गए डाटा के आधार करवाई गई है।