बैलून तकनीक का उपयोग
करीब चार मिलीमीटर के छोटे छेद से कैथेटर की सहायता से 24 मिलीमीटर का बैलून हृदय तक पहुंचाया गया। इस बैलून से संकुचित वाल्व को सफलतापूर्वक खोला गया। प्रक्रिया के दौरान गर्भस्थ शिशु को एक्सरे विकिरण से बचाने के लिए विशेष फीटल शील्ड का इस्तेमाल हुआ। उपचार के बाद महिला को सांस लेने में राहत मिली और हृदय के प्रेशर ग्रेडिएंट में सुधार हुआ। उपचार के बाद महिला और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित हैं।
एसआरएन अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता और टीमवर्क के कारण अब अत्यंत जटिल मामलों का भी सफल उपचार संभव है। - डॉ. एके वर्मा, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।