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एसआरएन अस्पताल : डॉक्टरों पर बोझ, एक मरीज पर मात्र 30 सेकंड

Wed, 07 Oct 2026 05:24 PM IST
विनोद सिंह पुनीत त्रिपाठी, प्रयागराज

सार

रिक्त पदों पर भर्ती न होने से सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों पर काम का दबाव बढ़ता जा रहा है। नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की गाइड लाइन के अनुसार एक ओपीडी में प्रतिदिन 40 मरीज देखे जाने चाहिए।
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बेली अस्पताल की ओपीडी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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रिक्त पदों पर भर्ती न होने से सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों पर काम का दबाव बढ़ता जा रहा है। नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) की गाइड लाइन के अनुसार एक ओपीडी में प्रतिदिन 40 मरीज देखे जाने चाहिए, लेकिन चार-पांच गुना अधिक मरीज ओपीडी में रोजाना देखे जाते हैं। ऐसे में एक मरीज के लिए औसतन 30 सेकंड का समय ही मिल पा रहा है।

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तेज बहादुर सप्रू अस्पताल (बेली) में चिकित्सकों के 46 पद स्वीकृत हैं लेकिन 34 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। रिक्त पदों की कमी को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 13 चिकित्सक अलग-अलग विभागों में तैनात किए गए हैं। मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) में कुल 49 पद स्वीकृत हैं। मौजूदा समय में 35 चिकित्सकों की तैनाती है। भरपाई के लिए एनएचएम के 10 और पुनर्योजन के दो व वॉक इन इंटरव्यू के जरिये एक चिकित्सक की तैनाती की गई है।

स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय में इन दिनों करीब 4000 मरीज ओपीडी में प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। अधिकांश विभागों की ओपीडी में 250 से 350 मरीज से भी ज्यादा रोजाना देखे जाते हैं। सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक इन मरीजों को देखना चिकित्सकों के लिए टेढ़ी खीर होता है। घंटों लाइन में खड़े होकर जब मरीज ओपीडी में पहुंचता है तो उसे अपनी परेशानी बताने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता। 

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बेली में 2300, कॉल्विन में 2200 व एसआरएन में 3800 मरीज देखे गए

सिर्फ मंगलवार की बात करें तो बेली में 2300, कॉल्विन में 2200 व एसआरएन अस्पताल में 3800 मरीज ओपीडी में देखे गए। इनमें इनमें 2023 नए मरीज व 1859 पुराने मरीज शामिल रहे। एसआरएन अस्पताल के मेडिसिन विभाग में सर्वाधिक 542 मरीज, ऑर्थोपेडिक्स में 373 मरीज, ईएनटी में 347 व त्वचा रोग विभाग में 340 मरीज देखे गए। इसके अलावा कार्डियोलॉजी में 236, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में 286, यूरोलॉजी में 220, सर्जरी में 217, न्यूरोलॉजी में 175, नेफ्रोलॉजी में 156 व मनोरोग विभाग में 144 मरीज देखे गए।
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अधर में सुपरस्पेशलिस्ट ओपीडी

इसी साल कॉल्विन व बेली अस्पताल में सुपरस्पेशलिस्ट ओपीडी चलाने का प्रस्ताव कैंटोनमेंट बोर्ड के छावनी सामान्य अस्पताल की तरफ से रखा गया था। शासन की तरफ से मंजूरी भी मिल गई। ईएमयू साइन होने के बाद दोनों अस्पतालों में ओपीडी चैंबर भी बन गए, लेकिन संचालन अब तक शुरू नहीं हुआ।

एसआरएन अस्पताल में प्रयागराज के अलावा 13 अन्य जिलों के मरीजों का भी दबाव रहता है। न्यूरोलॉजी, ईएनटी, मेडिसिन, त्वचा रोग, टीबी चेस्ट व कुछ अन्य विभाग ऐसे हैं, जिन पर मरीजों का दबाव हमेशा रहता है। - डॉ. नीलम सिंह, प्रमुख अधीक्षक, एसआरएन अस्पताल।

चिकित्सकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। जिसके संबंध में कई बार शासन को पत्र लिखा गया है। हमारे यहां मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स की ओपीडी में रोजाना 150 से 250 मरीज देखे जाते हैं। - डॉ. आरएस दुबे, प्रमुख अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल।

हमारे यहां चिकित्सकों के पद रिक्त होने के बाद एनएचएम के तहत चिकित्सक अलग-अलग विभागों की ओपीडी में लगाए गए हैं। मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। - डॉ. भावना शर्मा, सीएमएस, बेली अस्पताल।
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