एक साल में तीसरा पदक
कार्तिकेय की यह उपलब्धि इस वर्ष की उनकी एक और बड़ी सफलता है। एक साल के भीतर यह उनका तीसरा पदक है। लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर प्रयागराज की पहचान को मजबूत किया है। उनकी लगातार सफलता से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में कार्तिकेय भारतीय शूटिंग में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। उनकी मेहनत, अनुशासन और प्रतियोगिताओं में निरंतर बेहतर प्रदर्शन उन्हें भविष्य का मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पिता ही हैं कोच, परिवार ने जताई खुशी
कार्तिकेय की सफलता पर उनके पिता, वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व डइया राजवंश के सदस्य कुंवर दिवाकर प्रताप सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कार्तिकेय की सफलता के पीछे उसकी लगन, कठिन परिश्रम, धैर्य और अनुशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उल्लेखनीय है कि कार्तिकेय को शूटिंग की प्रारंभिक शिक्षा और प्रशिक्षण देने में उनके पिता कुंवर दिवाकर प्रताप सिंह स्वयं कोच की भूमिका निभा रहे हैं।
कार्तिकेय ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता चंद्रिका सिंह और पिता एवं कोच कुंवर दिवाकर प्रताप सिंह को दिया। उन्होंने कहा कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए माता-पिता और गुरु का आशीर्वाद, मार्गदर्शन और विश्वास बड़ी शक्ति होता है। मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
वीपी सिंह के परिवार से है संबंध
कार्तिकेय प्रताप सिंह का संबंध देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) के परिवार से भी है। वह वी.पी. सिंह के छोटे भाई कुंवर हरबक्स सिंह के प्रपौत्र हैं। शूटिंग के प्रति कार्तिकेय के लगाव और उनकी प्रतिभा को परिवार के संस्कारों एवं खेल के प्रति रुचि से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
शुभचिंतकों ने दी बधाई
कार्तिकेय की इस उपलब्धि पर गणेश प्रसाद मिश्र, आशुतोष महाराज जी, अंजनी त्रिपाठी, प्रत्यूष त्रिपाठी, सत्यम सिंह, रोशन सिंह, बुद्धसेन पटेल सहित परिवारजनों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त किया। सभी ने कार्तिकेय को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। शुभचिंतकों ने उम्मीद जताई कि कार्तिकेय आने वाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन कर प्रयागराज, उत्तर प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।