इस्कॉन से वेणी माधव मंदिर तक भक्ति की धारा
बलुआघाट स्थित इस्कॉन मंदिर, अलोपीबाग स्थित रूप गौड़ीय मठ, श्री मनकामेश्वर मंदिर, चौफटका स्थित अनंत माधव मंदिर, श्री राधाकृष्ण मंदिर और वेणी माधव मंदिर सहित शहर के अनेक मठ-मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, फल, पंचामृत और विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए गए। बलुआघाट स्थित इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान और अभिषेक श्रद्धा के साथ किए जाने की परंपरा रही है।
दारागंज के वेणी माधव मंदिर की रही विशेष आभा
संगम नगरी की धार्मिक पहचान में श्री वेणी माधव मंदिर का विशेष स्थान है। प्रयागराज नगर निगम के अनुसार, दारागंज स्थित यह मंदिर प्रयाग के द्वादश माधव स्वरूपों में प्रमुख माना जाता है और यहां शालिग्राम शिला से निर्मित भगवान वेणी माधव की प्रतिमा विराजमान है। पौराणिक मान्यताओं में प्रयाग को भगवान विष्णु के माधव स्वरूपों की नगरी बताया गया है। जन्माष्टमी जैसे पर्व पर इन प्राचीन वैष्णव परंपराओं से जुड़े मंदिरों में विशेष पूजा का दृश्य प्रयागराज की धार्मिक विरासत को और जीवंत कर देता है।
इन इलाकों में भी सजीं कृष्ण की झांकियां
शहर के दारागंज, चौफटका, तेलियरगंज, सिविल लाइंस, कटरा, चौक, जॉनसेनगंज, मुट्ठीगंज, राजरूपपुर, धूमनगंज, नैनी, झूंसी, फाफामऊ, कीडगंज, रामबाग, सोहबतियाबाग, बाई का बाग, जार्जटाउन और टैगोर टाउन सहित विभिन्न इलाकों में स्थित मंदिरों और मठों में भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी झांकियां सजाई गईं।
जन्माष्टमी के बाद निकलती हैं रंग-बिरंगी चौकियां
प्रयागराज में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दधिकांदो उत्सव भी है। जिला प्रशासन की सांस्कृतिक जानकारी के अनुसार, जन्माष्टमी के बाद प्रयागराज में दधिकांदो मनाया जाता है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण, सुभद्रा और बलभद्र की सजीव झांकियों वाली रंगीन चौकियां निकाली जाती हैं। इस तरह जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि प्रयागराज की मठ-मंदिर परंपरा, लोक संस्कृति, भक्ति संगीत और सामुदायिक उत्सव का भी जीवंत स्वरूप बन जाती है।