पूरे देश में 500 स्थानों पर मनाया जा रहा है खेल महोत्सव
पेफी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. पीयूष जैन ने कहा कि मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय खेल महोत्सव इस वर्ष 500 से अधिक स्थानों पर मनाया जा रहा है। यह साइक्लिंग एक्सपीडिशन ध्यानचंद जी की विरासत का उत्सव है और युवाओं को खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा। आने वाले वर्षों में इस पहल को भव्य राष्ट्रीय खेल महोत्सव के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है।
भारत की खेल संस्कृति को नई दिशा देने और फिटनेस का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मेजर ध्यानचंद चौक से 800 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय साइक्लिंग एक्सपीडिशन का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय खेल महोत्सव 2025 का हिस्सा है, जिसे शारीरिक शिक्षा फाउंडेशन और इंडिया (पेफी) ने फिट इंडिया मूवमेंट, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और ब्रह्माकुमारीज के सहयोग से आयोजित किया है।
इस ऐतिहासिक यात्रा का उद्देश्य हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी की अमर विरासत को सम्मानित करना और देशभर के युवाओं को खेल, अनुशासन, फिटनेस और राष्ट्रीय एकता से जोड़ना है। खेलेगा भारत, जीतेगा भारत, खेलों के मैदानों से विकसित भारत की नींव जैसे स्लोगन के साथ यह यात्रा शुरू हुई।
31 अगस्त को दिल्ली में होगा समापन
टीम लीडर ब्रिगेडियर डॉ. विक्रम सिंह (सेवानिवृत्त) ने भी पत्रकारों से बातचीत में साइक्लिंग के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक लाभों को विस्तार से बताया। उनके साथ प्रमुख साइकिलिस्ट योगेंद्र सिंह, मदन लाल, जगबीर सिंह, जय प्रकाश आदि शामिल रहे। इस ऐतिहासिक 8-दिवसीय यात्रा का रूट प्रयागराज, फतेहपुर, कानपुर, उरई, झांसी, ग्वालियर, मथुरा होकर तय किया गया है, जो 31 अगस्त 2025 को दिल्ली स्थित मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में पहुंचकर संपन्न होगी। यात्रा के दौरान स्कूल-कॉलेजों में खेल रैलियां, युवाओं के साथ संवाद, फिटनेस वर्कशॉप और एनसीसी कैडेट्स व आर्मी यूनिट्स के साथ विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे।
इस अवसर पर भानु प्रताप सिंह स्पोर्ट्स अकैडमी, नॉर्दन फुटबॉल एकेडमी और हॉकी एकेडमी के खिलाड़ी भी शामिल हुए। कार्यक्रम संयोजक एवं जिला सचिव पेफी अमित कुमार सिंह ने कहा कि यह आयोजन युवाओं को खेल और फिटनेस की ओर आकर्षित कर देश की खेल संस्कृति को नई ऊर्जा देगा। कार्यक्रम में रोचक दरबारी, मिथिलेश सिंह, उज्जवल शर्मा, डॉ. राम कृष्ण द्विवेदी, इंद्रनील घोष, आलोक कुमार, अंकुर द्विवेदी, सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी व खेल प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। मेजर ध्यानचंद की विरासत को जन-जन तक पहुंचाने और खेलों के मैदानों से विकसित भारत की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।