इलाहाबाद (ब्यूरो)। बुधवार आधी रात को पंचक खत्म होने के बाद बृहस्पतिवार की भोर से ही नए उत्साह और श्रद्धा के साथ कांवड़िए दशाश्वमेघ गंगा घाट पर पहुंचने लगे। यह सिलसिला भोर से ही शुरू हो गया था। बोल बम, ‘हर-हर गंगे’, ‘जय हो भोलेनाथ’, ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से घाट गूंजता रहा। पंचक की वजह से जो कांवड़िए कांवड़ नहीं उठा रहे थे, उन्हाेंने गंगा स्नान के बाद विधि विधान से कांवड़ को उठाया। मां गंगा और घाट के पास स्थित ब्रह्महेश्वर महादेव की विधि-विधान से पूजा करने के बाद जलाभिषेक के लिए बाबा विश्वनाथ और बैजनाथ धाम के लिए नाचते गाते, जयकारा लगाते हुए कांवड़ियों के समूह रवाना हुए। महिला कावंड़ियों की संख्या भी खूब रही। कावंड़ियों को विदा करने के लिए पूरा परिवार साथ आया।
कांवड़ियों के लिए घाट से गंगा भवन तक सजी दुकानों पर भीड़ लगी रही। कांवड़ियों की टी-शर्ट प्लास्टिक के त्रिशूल, फूल, नाग, कागज की झालर, शिवलिंग, जल ले जाने वाले नारंगी रंग के डिब्बे और अन्य सजावट के सामानों की जमकर खरीदारी हुई। पंचक की वजह से मायूस दुकानदारों के चेहरे भी ग्राहकों के पहुंचने से खिल गए। कांवड़िये 13 अगस्त को पुष्य नक्षत्र में जलाभिषेक करेंगे।