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UP : एसपी बताएं, न्यायिक विवेक पर क्यों की टिप्पणी, 10 अप्रैल तक मांगा जवाब

Sun, 05 Apr 2026 02:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

हाईकोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट की मांग करने वाले जांच अधिकारी के निलंबन पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने बस्ती के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से 10 अप्रैल तक हलफनामा तलब कर पूछा है कि उन्होंने न्यायिक विवेक पर टिप्पणी क्यों की।
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कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट की मांग करने वाले जांच अधिकारी के निलंबन पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने बस्ती के पुलिस अधीक्षक (एसपी) से 10 अप्रैल तक हलफनामा तलब कर पूछा है कि उन्होंने न्यायिक विवेक पर टिप्पणी क्यों की। गैर जमानती वारंट जारी करना या न करना अदालत का विवेकाधिकार है, पुलिस का नहीं।

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यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने रत्नेश कुमार उर्फ राजू शुक्ला की याचिका पर की है। इससे पहले कोर्ट ने एसपी से व्यक्तिगत हलफनामा तलब कर गैर जमानती वारंट के बारे में पूछा था। इसके अनुपालन में हलफनामा दाखिल कर एसपी ने बताया कि गैर जमानती वारंट की मांग करने वाले जांच अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। तर्क दिया कि अधिकारी ने पर्याप्त सबूत जुटाए बिना वारंट लिया। इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे एसीजेएम कोर्ट की अवमानना माना है। 

न्यायिक प्रणाली के कार्यों का व्यावहारिक अनुभव पर रखे विचार

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के लाइब्रेरी हॉल में न्यायिक प्रणाली के कार्यों का व्यावहारिक अनुभव विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें रामा विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश कानपुर नगर के 36 विधि छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम कुलश्रेष्ठ व संचालन उपाध्यक्ष अमित कुमार सिंह (सोनू) ने किया। संयोजक हरीश सिंह ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान स्वाति सिंह, बलदेव शुक्ला, सुनील मिश्र आदि मौजूद रहे। 

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