इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में तीन जुलाई को दर्ज किए गए मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता के प्रावधान लागू नहीं करने पर हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता एक जुलाई 2024 को लागू हो गई थी तो दुष्कर्म की एफआईआर आईपीसी की धाराओं में क्यों दर्ज की गई। न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान एवं न्यायमूर्ति मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी की खंडपीठ ने दीपू व अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया है।
कोर्ट ने आदेश में कहा कि तीन जुलाई की एफआईआर आईपीसी की धाराओं में दर्ज की गई है। जबकि एक जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता लागू हुई है। याचिका में दुष्कर्म की एफआईआर रद्द करने की मांग की गई है। 14 वर्षीय पीड़िता ने आरोप लगाया है कि 28 जून को दीपू सहित अन्य आरोपियों ने पिस्तौल के बल पर उसके साथ अश्लील हरकतें कीं। अप्रैल माह में भी दीपू ने पिस्तौल के बल पर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपियों पर तीन जुलाई को आईपीसी की संबंधित धाराओं एवं पॉक्सो एक्ट की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया। आरोपियों ने याचिका दाखिल कर एफआईआर को चुनौती दी है।