शुक्रवार शाम प्रयागराज जंक्शन का नजारा कुछ अलग ही दास्तान बयां कर रहा था। चारों तरफ मायूसी, टिकट काउंटरों पर लंबी कतारें और प्लेटफाॅर्म पर बैठे परेशान यात्रियों के चेहरे दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों के अचानक निरस्त होने की कहानी कह रहे थे।
सबसे बड़ा दर्द वैष्णो देवी जाने का सपना संजोकर घर से निकलीं दीक्षा मालवीय का था। दिल्ली जा रही दीक्षा ने बताया कि उन्हें वहां से श्रीशक्ति एक्सप्रेस पकड़कर सीधे श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा जाना था लेकिन ट्रेन निरस्त होने की खबर ने उनके इस पावन सफर और पूरे कार्यक्रम को ही पूरी तरह चौपट कर दिया।
प्लेटफाॅर्म नंबर एक पर खड़े धर्मेंद्र कुमार प्रजापति भी खासे निराश दिखे, जिन्हें दिल्ली से आगे करनाल पहुंचना था। उन्होंने कहा कि अब समझ नहीं आ रहा था कि इस अचानक आए संकट से कैसे निपटें। नागेश्वर शर्मा का हाल भी कुछ ऐसा ही था, जिनका रिजर्वेशन प्रयागराज एक्सप्रेस में था, मायूसी के बीच अब वे रीवा एक्सप्रेस के सहारे आनंद विहार तक पहुंचने की जुगत भिड़ाते दिखे क्योंकि शनिवार को दिल्ली में उनका एक बेहद जरूरी काम अटका हुआ था।
श्यामा देवी तो पूरे परिवार के साथ स्टेशन पर पहुंची थीं, जंक्शन आने के बाद उन्हें पता चला कि उनकी ट्रेन रद्द हो चुकी है, जिसके बाद अब वे मजबूरन बच्चों और परिवार को लेकर स्लीपर बस से सफर करने का विकल्प तलाश रही थीं।
हालांकि, कुछ यात्रियों को थोड़ा इत्तेफाकन सहारा भी मिला। गौरव श्याम पांडेय का रिजर्वेशन हमसफर एक्सप्रेस में था लेकिन जैसे ही ट्रेन निरस्तीकरण का मैसेज उनके फोन पर आया किस्मत ने साथ दिया और उन्हें शाम को ही दिल्ली जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस में सीट मिल गई, जिससे उनकी जान में जान आई। वहीं, गौरीशंकर जैसे अन्य यात्री भी स्टेशन पर वैकल्पिक व्यवस्था तलाशते नजर आए।
आनंद विहार और पुरानी दिल्ली जाने वाली ट्रेनों की दी जाती रही जानकारी
दूसरी तरफ जंक्शन पर मची अफरातफरी के बीच आरपीएफ प्रभारी अमित मीना लगातार माइक थामे यात्रियों को राहत देने की कोशिश में जुटे रहे। वे लगातार माइक के जरिये आनंद विहार और पुरानी दिल्ली जाने वाली अन्य चालू ट्रेनों की सटीक जानकारी देकर मुसाफिरों की मदद करते दिखे, ताकि इस आपाधापी में किसी को और बड़ी परेशानी न झेलनी पड़े।