केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) में सेंधमारी करने वाले सॉल्वर गिरोह का एसटीएफ ने भंडाफोड़ किया। प्रयागराज व गोरखपुर में छापेमारी करते हुए कुल सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से छह प्रयागराज में पकड़े गए, जिनमें तीन सॉल्वर व एक अभ्यर्थी शामिल हैं। इनके कब्जे से एडमिट कार्ड, जाली आधार-पैन कार्ड के अलावा नगद व चार लाख के एडवांस चेक बरामद हुए हैं।
सीटीईटी 20 का आयोजन रविवार को दो पालियों में किया गया था। एसटीएफ अफसरों के मुताबिक, इसी दौरान सूचना मिली कि केपी उच्च शिक्षा संस्थान झलवा व गोरखपुर में इंदिरा गांधी गर्ल्स डिग्री कॉलेज रामपुर, तारामंडल में मूल अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठे हैं। इस पर गोरखपुर एसटीएफ को सूचना देते हुए स्थानीय इकाई झलवा स्थित केंद्र में पहुंची तो वहां दो सॉल्वर परीक्षा देते मिले। इनमें से एक महिला है। दोनों से पूछताछ में मिली जानकारी के बाद एसटीएफ ने इविवि साइंस फैकल्टी फुटबाल ग्राउंड के पास दबिश देकर सरगना समेत चार अन्य को गिरफ्तार किया।
उधर, गोरखपुर में भी बताए गए केंद्र से एक सॉल्वर गिरफ्तार किया गया। सरगना जीआईसी में लेक्चरर, तीन अन्य भी अध्यापक एसटीएफ ने जिन सात लोगों को सीटीईटी में धांधली के आरोप में पकड़ा है, उनमें से चार अध्यापक हैं। गिरोह का सरगना प्रशांत सिंह जीआईसी अमरोहा में लेक्चरर है। इसी तरह धमेंद्र सिंह प्राथमिक विद्यालय उसरी रायबरेली, पूजा देवी प्राथमिक विद्यालय बिंदकी फतेहपुर व मुनेश कुमार चौहान निजी स्कूल में अध्यापक है।
पूछताछ में बताया कि सीटीईटी के अभ्यर्थियों को पास कराने का ठेका लेता था। बदले में वह डेढ़ से दो लाख रुपये देता था। अभ्यर्थी और सॉल्वर की फोटो मिक्स कराई जाती थी। एक विशेष साफ्टवेयर की मदद से दोनों फोटो को मिक्स कर एक फोटो बनती है। उसी मिक्स फोटो को अभ्यर्थी के प्रवेश पत्र और अन्य आईडी में इस्तेमाल किया जाता था। इससे उनकी पहचान करना आसान हो जाता है।