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तो ढाई वर्ष में कैसे निर्मल होगी गंगा

Fri, 17 Jul 2015 01:52 AM IST
विजय सक्सेना/अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 तक गंगा जल को पूरी तरह निर्मल करने का दावा किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्री उमा भारती कई मौकों पर यह ऐलान कर चुकी हैं लेकिन सरकार अगले ढाई वर्ष में इसे कैसे पूरा करेगी, बड़ा सवाल है। गंगा के किनारे के अन्य जिलों की बात दूर, इलाहाबाद में ही फाफामऊ, नैनी और झूंसी से सीवर और नालों का लाखों लीटर पानी प्रतिदिन सीधे गंगा में गिर रहा है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की ओर से फाफामऊ और नैनी के लिए सीवर लाइन, एसटीपी और पंपिंग स्टेशन के लिए अब तक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) ही तैयार की जा रही है। इसे अब से तीन माह बाद यानी अक्तूबर में राज्य सरकार के जरिए केंद्र को भेजा जाएगा जिसकी स्वीकृति मिलने में वक्त लगेगा। टेंडर आदि की लंबी प्रक्रिया भी चलेगी। ऐसे में मोदी और उमा भारती के दावों पर सवाल खड़ा होना लाजमी है।
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उत्तर प्रदेश में गंगा के किनारे के अन्य जिलों को छोड़ दें तो इलाहाबाद में स्थिति बेहद खराब है। यहां पांच एसटीपी तो चल रहे हैं, बावजूद इसके भारी मात्रा में सीवर और नालों का गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ समय में सभी एसटीपी पूरी क्षमता से चलने लगेंगे, जिससे शहर से निकलने वाला सीवर और नाले का पानी एसटीपी में शोधित होने के बाद गंगा में छोड़ा जाएगा लेकिन शहर के बाहरी क्षेत्रों फाफामऊ, नैनी और झूंसी में अगले तीन-चार साल तक सीवर और नाले का पानी गंगा में गिरता ही रहेगा क्योंकि इन तीनों क्षेत्रों में अभी न सीवर लाइन है और न ही एसटीपी।

गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई फाफामऊ और नैनी के लिए तो डीपीआर बना रहा लेकिन झूंसी को अब भी इसमें शामिल नहीं किया गया है। इकाई डिस्ट्रिक्ट एफ के तहत फाफामऊ में सौ किमी सीवर लाइन, दो सीवरेज पंपिंग स्टेशन, 10 एमएलडी का एसटीपी तथा डिस्ट्रिक्ट जी के तहत नैनी में 150 किमी सीवर लाइन, चार पंपिंग स्टेशन और 40 एमएलडी के एसटीपी का डीपीआर तैयार कर रहा है। पिछले माह यहां आई केंद्रीय मंत्री उमा भारती को इकाई के महाप्रबंधक अजेय सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर जेपी मणि ने इसके बारे में जानकारी दी थी। यह भी बताया था कि डीपीआर अक्तूबर में सरकार को भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि इन दोनों प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिलने के बाद झूंसी के लिए डीपीआर तैयार होगा। ऐसे में यह समझ से परे है कि उमा भारती किस आधार पर 2018 तक गंगा जल को पूरी तरह निर्मल करने का दावा कर रही हैं।
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