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आधा दर्जन अफसरों से स्पष्टीकरण तलब

Fri, 17 Jul 2015 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। रिटायरमेंट के बाद पेंशन एवं उससे जुड़े अन्य प्रकार के भुगतान के लिए पेंशनर दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं और उनकी समस्या का निस्तारण करना तो दूर, अफसरों को इतनी भी फुर्सत नहीं कि पेंशन अदालत में पहुंचकर कम से कम यह बता सकें कि पेंशनर को राहत के लिए और कितने दिन इंतजार करना पड़ेगा। मंगलवार को आयोजित मंडलीय पेंशन अदालत में ऐसे अफसरों को गैरहाजिर रहना महंगा पड़ गया। कमिश्नर राजन शुक्ल ने सभी अनुपस्थिति अफसरों से स्पष्टीकरण तलब कर लिया। साथ ही गरिमा के विपरीत आचरण पर एक कर्मचारी को प्रतिकूल प्रविष्टि भी जारी कर दी।
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कमिश्नरी के गांधी सभागार में आयोजित मंडलीय पेंशन अदालत में 10 नए और आठ पुराने मामलों पर सुनवाई होनी थी। कुछ पुराने मामलों के निस्तारण को लेकर एसडीएम फूलपुर, अधिशासी अभियंता नलकूप निर्माण खंड बघाड़ा, अधीक्षक राजकीय उद्यान, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, इलाहाबाद के बेसिक शिक्षाधिकारी इलाहाबाद और प्रतापगढ़ के बेसिक शिक्षाधिकारी को आख्या प्रस्तुत करनी थी लेकिन ये अफसर मंडलीय अदालत से गैरहाजिर थे। इस पर कमिश्नर नाराज हो गए और उन्होंने इन सभी छह अफसरों से स्पष्टीकरण तलब कर लिया।

यह हालत तब है, जब शासन ने स्पष्ट आदेश जारी कर रखा है कि सेवानिवृत्ति के आखिरी दिन पेंशनर को ग्रेच्युटी, पेंशन के सारांशीकरण सहित सभी लाभ मिल जाने चाहिए। अफसरों के रवैये से खफा कमिश्नर ने पेंशन से संबंधित मामलों का पूरी संवेदशीलता के साथ निस्तारण किया जाए। इस दौरान अदालत में गरिमा के विपरीत आचरण पर कमिश्नर ने अपर मुख्य अधिकारी के अधीनस्थ कर्मचारी को प्रतिकूल प्रविष्टि भी जारी कर दी।
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