इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को अब प्रवेश पत्र, परिचय पत्र आदि डाक्यूमेंट के लिए बार-बार लाइन नहीं लगानी होगी। वार्षिक परीक्षा के प्रवेश पत्र के लिए भी भटकना नहीं पड़ेगा। विश्वविद्यालय में सिंगल विंडो सिस्टम लागू कर दिया गया है। इसकी मदद से सारी प्रक्रिया दाखिले के समय प्रवेश भवन पर ही पूरी कर ली जा रही है। इतना ही नहीं ये सभी डाक्यूमेंट और फीस रसीद भी रंगीन दी जा रही है। इससे विद्यार्थियों की सुविधा बढ़ने के साथ धांधली पर अंकुश लगने के दावे भी किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं इस प्रक्रिया के लागू होने से सभी विद्यार्थियों का परिचयपत्र बनना भी सुनिश्चित हो जाएगा। स्नातक में प्रवेश लेने विद्यार्थियों को पूरे तीन साल तक इसका लाभ होगा।
विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रकोष्ठ के गठन और दाखिले की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने का फायदा अब दिखने लगा है। परिचय पत्र, फीस रसीद आदि पर ब्लैक एंड व्हाइट फोटो होने की वजह से कई विद्यार्थी की पहचान मुश्किल हो जाती थी। इसकी वजह से फर्जीवाड़े की शिकायत भी होती रही, लेकिन अब सभी डाक्यूमेंट रंगीन होंगे। इसके लिए प्रिंटर मंगा लिया गया है। इसके अलावा अभी तक छात्र-छात्राओं के परिचय पत्र चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में बनते रहे। इसके लिए वहां लंबी-लंबी लाइनें लगती थीं।
इसकी वजह से बड़ी संख्या में विद्यार्थी परिचय पत्र ही नहीं बनवाते। ऐसे में चीफ प्रॉक्टर के पास बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का डिटेल नहीं होता। फर्जी परिचयपत्र की भी काफी शिकायत रही, लेकिन अब प्रवेश भवन से परिचय पत्र बन रहा है। इससे इस तरह की सभी शिकायतें दूर हो जाएंगी। इसका फायदा छात्रसंघ चुनाव में भी होगा तथा वोटर लिस्ट बनाने में मदद मिलेगी। प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर जगदंबा सिंह ने बताया कि अब विद्यार्थियों को दूसरे काम के लिए कहीं भटकना नहीं पड़ेगा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भले ही सबकुछ थम सा गया हो लेकिन प्रवेश प्रक्रिया जल्दी शुरू होने से भविष्य में अच्छे की उम्मीद जरूर बंधी है। विश्वविद्यालय में पहली बार ऐसा हो रहा है कि 15 जून से ही काउंसलिंग और दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई। इसका फायदा भी दिख रहा है तथा पहले चरण की काउंसलिंग में ज्यादातर सीटें भरने के साथ मेधावी भी दाखिले के लिए आगे आए हैं।
प्रवेश प्रकोष्ठ के इस पहल में बोर्ड से भी काफी मदद मिली और सभी के बारहवीं के रिजल्ट समय रहते घोषित कर दिए गए हैं। विश्वविद्यालय में पूर्व के वर्षों में जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई से काउंसलिंग शुरू हो पाती थी। ऐसे में अगस्त-सितंबर तक प्रवेश प्रक्रिया चलती थी। इसकी वजह से कक्षाएं भी देर से शुरू हो पातीं। इसके अलावा पहले प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाने से ज्यादातर अच्छे विद्यार्थी दूसरे संस्थानों में दाखिला ले लेते हैं। ऐसे में यहां की कटऑफ शून्य से भी नीचे चली जाती थी, लेकिन इस बार हालात में बदलाव की बात कही जा रही है।
प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक का दावा है कि इस बार 15 जून से दाखिला शुरू हो गया है और 13 जुलाई को नया सत्र शुरू होने से पहले स्नातक में प्रवेश कार्य तकरीबन पूरा हो जाएगा। जबकि, अभी दूसरे विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। इस पहल का नतीजा है कि बीकॉम में पहले दिन ही कुल बुलाए गए 180 में से 117 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। मेरिट में प्रथम दो स्थान पर रहने वालों को छोड़कर पहले 10 में से आठ विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। बीएससी गणित में भी पहले दिन कुल बुलाए गए 250 में से 142 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। पहले तीन स्थान पर रहने वाले विद्यार्थी प्रवेश के लिए नहीं पहुंचे लेकिन प्रथम 10 में से छह ने दाखिला लिया। प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर जगदंबा सिंह का कहना है कि पूर्व के वर्षों में पहले दिन 80 से 90 विद्यार्थी ही प्रवेश के लिए आते थे लेकिन इस बार स्थिति बेहतर है।