स्मार्ट सिटी पर बन रही योजना के क्रम में शुक्रवार को विभिन्न विभागों ने अपनी योजनाओं से केंद्रीय शहरी मंत्रालय के सचिव दुर्गाशंकर मिश्र को अवगत कराया। सरकिट हाउस में दोपहर बाद महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी, कमिश्नर बीके सिंह, डीएम भवनाथ सिंह, डीआईजी भगवान स्वरूप, एडीए वीसी अजय कुमार सिंह, नगर आयुक्त आरपी सिंह की मौजूदगी में विभागों की ओर से विभिन्न कामों का प्रेजेंटेशन हुआ। नगर निगम के पर्यावरण अभियंता ने बसवार स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट कलेक्शन आदि के बारे में जानकारी दी। बताया कि शहर से 550 टन कूड़ा रोज निकलता है। 300 टन कूड़ा उठ रहा है। उपकरणों की कमी के कारण दिक्कत है। व्यावसायिक क्षेत्र में कूड़ा कलेेक्शन बड़ी समस्या है। यहां रात में कूड़ा उठाने की व्यवस्था की जा रही है। डंपिंग ग्राउंड खत्म किए जाएंगे। बताया कि एनजीआरबीए के तहत पांच धोबीघाट और 43 शौचालय बनाए गए हैं। 123 अस्पताल कचरा नहीं दे रहे हैं। विद्युत शवदाह गृह के बारे में भी बताया। अपर सचिव ने कूड़े से बिजली, खाद और तेल बनाने को कहा। बताया कि इसकेलिए नई तकनीक भी आ गई है। उन्होंने बसवार में 24 एकड़ में प्लाट पर भी आपत्ति जताई। कहा कि नई तकनीक से एक एकड़ जमीन पर 170 टन कूड़े का निस्तारण हो सकता है। ऐसे में इतने बड़े प्लांट का कोई मतलब नहीं। इतनी बड़ी जमीन का उपयोग आवासीय योजना के लिए होना चाहिए।
जल निगम ने जलभराव की समस्या दूर करने के लिए 8.77 करोड़ की स्टार्म वाटर योजना के बारे में जानकारी, जबकि जलकल विभाग के जीएम आरबी सिंह ने पेयजल उपलब्धता और आपूर्ति के बारे में जानकारी। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक जेपी मणि ने जेएनएनयूआरएम एवं एनजीआरबीए के तहत सीवर योजना, एसटीपी निर्माण, नैनी, झूंसी, फाफामऊ में प्रस्तावित सीवर एवं एसटीपी के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि सभी एसटीपी काम कर रहे हैं। नई सीवर लाइन में अब तक मात्र 40 प्रतिशत कनेक्शन पर अपर सचिव ने नाखुशी जताई। इसे जल्द पूरा करने को कहा। मणि ने बताया कि रीवर फ्रंट डेवलपमेंट पर काम होने से गंगा में प्रदूषण कम होगा।
रोडवेज के जयदीप वर्मा ने महानगरी बसों के संचालन, बसों में जीपीआरएस सिस्टम आदि के बारे में बताया। आरटीओ भीमसेन सिंह ने निजी, व्यावसायिक वाहनों की संख्या, मॉडल कंट्रोल रूम, इंटीग्रेटेट मैनेजमेंट सिस्टम, आटोमेटिक सिगलिंग आदि के बारे में जानकारी दी। एडीए ने रीवर फ्रंड डेवलपमेंट के बारे में बताया। डॉ.जगदीश गुलाटी ने शिक्षा के क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट, हेल्थ केयर, मेडिकल एजुकेशन, डिग्री, डिप्लोमा कोर्सेस चलाने, नॉलेज सिटी या नॉलेज पार्क के निर्माण पर प्रेजेेंटेशन दिया। उन्होंने निजी शैक्षिक संस्थाओं को सिंगल विंडों के तहत सुविधा देने का भी सुझाव दिया।
बिजली विभाग की योजना